Wednesday, 30 March 2022

समानार्थी शब्द (४००)

 🌳समानार्थी शब्द🌳


1.    अभिनेता – नट


2.   अश्व – घोडा ,तुरग,वारू,तुरंगम,वाजी


3.   अपराध -गुन्हा


4.   अग्नि – विस्तव,वन्ही ,पावक ,अनल,आग


5.   अत्याचार – जुलूम,अन्याय


6.   अचल – पर्वत,स्थिर,शांत


7.   अपाय – इजा,त्रास


8.   अमृत – संजीवनी,सुधा,पीयूष


9.  अवचित – अचानक,एकदम


10.अवर्षण – दुष्काळ


11. अमित – अगणित,असंख्य,अमर्याद


12.  अस्त – मावळणे


13.   अविरत – अखंड,सतत


14.   अर्थ – मतलब,उद्देश,हेतू,भावार्थ,तात्पर्य,भाव


15.  अक्षय – न संपणारा


16. अही – भुजंग,सर्प,साप


17. अवहेलना – अपमान


18. अनर्थ – संकट,अरिष्ट


19. अनुरक्ता – प्रेमात पडलेली


20.अभियान – मोहीम


21. अभिषेक – अभिशेष,अभिषव


22.अभ्यास – सराव,व्यासंग,परिपाठ


23.अरण्य – वन,रान,कानन,जंगल,विपिन,अटवी


24.अभिनय – हावभाव,अंगविक्षेप


25. अहंकार – घमेंड,गर्व


26. आगत्याने – स्वागतशील दृष्टीने


27. अर्जुन – पार्थ,भारत,किरीट,फाल्गुन,धनंजय


28.आई – माय,माऊली,माता,जननी,जन्मदात्री,मातोश्री


29.आमूलाग्र – मुळापासून शेंड्यापर्यंत


30.आरसा – दर्पण


31. आकांक्षा – इच्छा


32. आण – शपथ


33.आकाश – नभ,गगन,अंबर,आभाळ,खग,व्योम,तारांगण,अवकाश,अंतरिक्ष


34.आयुष्य – जीवन


35.आळशी – ऐदी,कामचुकार,सुस्त,मंद,निरुद्योगी,उठाळ,आळसट


36.आनंद – आमोद,हर्ष,तोष,मोद,संतोष,प्रमोद


37.आस्था -जिव्हाळा,आदर,अगत्य,आपुलकी


38.आश्चर्य – अचंबा,नवल,विस्मय


39. आज्ञा – हुकूम,आदेश


40. आपत्ती – संकट


41.आकाशवाणी – नभोवाणी


42.आहार – भोजन,खाद्य


43.आमरण – मरेपर्यंत


44.आसन – बैठक


45. आठवण – स्मरण,स्मृती


46.आस – इच्छा,मनीषा


47.आसक्ती – हव्यास,लोभ


48.अंग – तनू,काया,शरीर,देह


49. अंगार – निखारा


50.अंगना – स्त्री


51. अंत – अखेर,शेवट


52.अंतरिक्ष – अवकाश


53. इहलोक – मृत्यूलोक


54.इशारा – खूण,सूचना


55. इंदू – चंद्र


56. इंद्र – देवेंद्र ,सुरेन्द्र


57. इच्छा – मनीषा,अपेक्षा,आशा,वासना,आराजू,आकांक्षा


58. ईश्वर – प्रभू,परमेश्वर,देव,ईश,अलक्ष,अलक,आनंदघन


59. उणीव – न्यून,न्यूनता,कमतरता


60.उपवन – बाग,बगीचा,उद्यान,वाटिका


61. उदर – पोट


62. उतारू – यात्रिक,प्रवासी. यात्रेकरू


63. उदास – खिन्न,दु:खी


64.उपनयन – मुंज


65.उंट – उष्ट्र,उष्टर


66.उत्कर्ष – भरभराट,वाढ,संपन्नता


67.उपद्रव – छळ,त्रास


68.ऊर्जा -शक्ती


69.ऊन – ऊर्ण,लोकर


70. ऋषि – साधू,मुनी


71. एकजूट – ऐक्य,एकता,एकी


72.ऐतोबा – काम न करणारा


73.ऐश्वर्य – वैभव,श्रीमंती


74. औक्षण – ओवाळणे


75. कष्ट – मेहनत,श्रम


76.करमणूक – मनोरंजन


77.कट – कारस्थान


78.कटी – कंबर


79.कृष्ण – मुरलीधर,देवकीपुत्र,मुरारी,कन्हैया,वासुदेव,कान्हा


80.कठोर – निर्दय,निष्ठुर


81.कनक – कांचन,सोने,सुवर्ण,हेम


82.कमळ – अंबुज,पंकज,राजीव,पुष्कर,कुमुदिनी,सरोज,पद्म,नलिनी,नीरज,अब्ज


83.कपाळ – भाल,लल्लाट,मस्तक,कपोल,अलिक,निढळ


84.काठ – किनारा,तीर,तट


85.कासव – कूर्म,कच्छ,कमठ,कच्छप


86.काळजी – आस्था,फिकीर,कळकळ,चिंता


87.कान – श्रवण,श्रोत्र,कर्ण


88.काळोख – तिमिर,अंधार,तम


89.कावळा – एकाक्ष,काक,वायस,काऊ


90.काष्ठ – लाकूड


91. किल्ला – तट,दुर्ग,गड


92.किंकर – अनुचर,सेवक,दास,भृत्य


93.किरण – रश्मी,कर,अंशु,मयुख


94.किमया – चमत्कार,जादू


95.क्रीडा – मौज,खेळ,विहार,विलास,मनोरंजन


96.कुटी – झोपडी


97. कुरूप – बेढब,विद्रूप,आकाररहित


98. कोकीळ – पिक,कोयल,कोगुळ


99.कृपण – चिक्कू ,कंजूष,हिमटा,खंक,कोमटा


100.कृश – हडकुळा


101.खडक – पाषाण ,खूप मोठा दगड


102.खटाटोप – मेहनत,प्रयत्न,धडपड


103.खल – दुष्ट,नीच,दुर्जन


104.    खळ – दुर्जन


105.    खजिना -भांडार,तिजोरी,द्रव्य,कोश


106.    खग – विहग,पक्षी,द्विज,अंडज,शंकुट


107.    खड्ग – तलवार


108.    खूण – निशाणी,चिन्ह,संकेत


109.    खून – हत्या,वध


110.     खेडे – ग्राम,गाव


111.      खंत – दु:ख,खेद


112.     ख्याती – कीर्ती,प्रसिद्धी


113.     गवई – गायक


114.     ग्रंथ – पुस्तक


115.     गरज – निकड,आवश्यकता,जरूरी


116.     गनीम – अरी,शत्रू


117.      गर्व – अहंकार


118.     गरुड – खगेंद्र,द्विजराज,वैनतेय,खगेश्वर


119.     गणपती - लंबोदर,गौरीसुत,गजानन,विनायक,एकदंत,प्रथमेश,गजवदन,गौरीनंदन,गणेश,विघ्नहर्ता,गणराय,चिंतामणी


120.    गरुड – द्विजराज,वैनतेय,खगेंद्र


121.     गृहिणी – घरधनीण


122.     गर्दी – खच,दाटी


123.    गाणे – गीत


124.    गाय – गो,धेनू,गोमाता


125.     गोष्ट – कहाणी,कथा


126.    गौरव – सत्कार,सन्मान,अभिनंदन


127.     गंध – परिमळ,वास


128.    घर – गृह,सदन,निवास,निकेतन,आलय,भवन,धाम


129.    घोडा – अश्व,हय,तुरग,वारू


130.    घास – कवळ,ग्रास


131.     चेहरा – मुख,तोंड,आनन,वदन


132.     चौफेर – सर्वत्र,चहूकडे


133.    चंद्र – शशांक,शशी,राजनीनाथ,इंदू,सुधाकर,सोम,हिमांशु,शुधांशु,निशानाथ,विधू


134.    चांदणे – ज्योत्स्ना,चंद्रिका,कौमुदी


135.     चवताळणे – रागावणे,चिडणे


136.    छडा – आवड,नाद


137.     छिद्र – भोक


138.    जरा – म्हातारपण


139.    जरब – दबदबा,दरारा,धाक,दहशत,वचक


140.     जयघोष – जयजयकार


141.     जमीन – भू,भूई,भूमी


142.    जिन्नस – पदार्थ


143.    जीवन – पाणी,आयुष्य,जल


144.    जिव्हाळा – प्रेम,माया,ममता


145.    जीर्ण – जुने


146.    ज्येष्ठ – वरिष्ठ,मोठा


147.     जल – जीवन,पाणी,नीर,सलिल,उदक


148.    झाड – तरु,वृक्ष,द्रुम,पादप,शाखी,अगम


149.    झुंबड – रीघ,गर्दी,थवा,दाटी,खच


150.    झुंज – संग्राम,लढा,संघर्ष


151.     झेंडा – निशाण,ध्वज,पताका


152.     झोका – हिंदोळा


153.     टंचाई – कमतरता


154.    ठसा – खूण


155.     ठग – लुटारू


156.    ठक – लबाड


157.    ठेकेदार – मक्तेदार,कंत्राटदार


158.    डोके – शिर,मस्तक,माथा,शीर्ष


159.    डोंगर –नग,पर्वत,अचल,शैल


160.    डोळे – अक्ष,चक्षू,नेत्र,लोचन,नयन,आवाळू


161.     ढग – जलद,मेघ,अंबुद,अभ्र,पयोद


162.    ढीग – रास


163.    तलाव – सारस,कासार,तळे,तटाक,तडाग,सरोवर


164.    त्वेष – आवेश,स्फुरण


165.     तरुण – युवक,जवान


166.    तारुण्य – ज्वानी,यौवन,जवानी


167.     ताकद – बल,शक्ती


168.    तोंड – तुंड,मुख,आनन,वदन


169.    तारे – चांदण्या,नक्षत्रे,तारका


170.    तारू – गलबत,जहाज


171.      तलवार – खड्ग,समशेर


172.     तिमिर – काळोख,अंधार


173.     तृष्णा – लालसा,तहान


174.     तृण – गवत


175.     तुरुंग – कैदखाना,कारागृह,बंदीखाना


176.     थंड – गार,शीतल,शीत


177.     थवा – घोळका,गट,समुदाय,जमाव,चमू


178.     दंत – दात


179.     दंडवत – नमस्कार


180.    दास – नोकर,चाकर


181.     दारा – पत्नी,बायको


182.    दानव – दैत्य,असुर,राक्षस


183.    दागिना – भूषण,अलंकार


184.    दिन – वासर,दिवस,अह,वार


185.    दीन – गरीब


186.    दुजा – दुसरा


187.     दुनिया – जग


188.    दुर्दशा – दु:स्थिति,दुरवस्था


189.    दुर्धर – गहन,कठीण


190.    दूध – दुग्ध,पय,क्षीर


191.     दैत्य – असुर,राक्षस,दानव


192.    देव – ईश्वर,ईश,सुर,परमेश,अमर,परमेश्वर


193.    दैन्य – दारिद्रय


194.    देऊळ – देवालय,राऊळ,मंदिर


195.    धरती – पृथ्वी,वसुंधरा,धरणी,क्षोणी,वसुधा,धरित्री,मही,भूमी,रसा,अवनी


196.    धवल – शुभ्र,पांढरे


197.     धनुष्य – कोदंड,चाप,तिरकमठा,धनू,कमटा,कार्मुक


198.    धन – संपत्ती,पैसा,वित्त,संपदा,द्रव्य,दौलत


199.    धूर्त – भांडखोर,लबाड,लुच्चा,चलाख,अरकाट,लफंगा,कावेबाज


200.  नगर – पूर,पुरी,शहर


201.    नजराणा – उपहार,भेट


202.   नवनीत – लोणी


203.   नवरा – वल्लभ,पती,भ्रतार,कांत,धव,भर्ता


204.   नमस्कार – वंदन,प्रणिपात,नमन,अभिवादन


205.   नदी – तटिनी,सरिता,जीवनदायिनी,तरंगिणी


206.   नृप – भूपाळ,भूपती,भूप,राजा,महीपती,नरेश


207.   नाथ – स्वामी,धनी


208.   निष्णात – प्रवीण,तरबेज


209.   नारळ – नारिकेल,श्रीफळ


210.    निर्जन – ओसाड


211.     निर्झर – झरा


212.    निर्वाळा – खात्रीपूर्वक


213.     निर्मळ – स्वच्छ


214.    नीच – अधम,तुच्छ,चांडाळ


215.     नेता – पुढारी,नायक


216.    नैपुण्य – कौशल्य


217.     नोकर – दास,सेवक,चाकर,उलिंग,आर्यिक


218.    नौदल – आरमार


219.    पशू – जनावर,श्वापद,प्राणी


220.   पती – भ्रतार,नवरा


221.    पक्षी – पाखरू,खग,द्विज,विहग,अंडज,विहंग


222.   पत्नी – बायको,कांता,अर्धांगिनी,दार,भार्या,कलत्र,जाया


223.   पर्वत – अद्री,गिरी,नग,अचल,शैल


224.   परिमल – सुगंध,सुवास


225.    पाणी – पय,जल,उदक,नीर,वारी,जीवन,सलील,अंबू,तोय


226.    पारंगत – तरबेज,निपुण


227.    पान – पत्र,पल्लव,पर्ण


228.   पार्वती – उमा,भवानी,गौरी,कन्याकुमारी,दुर्गा,काली


229.   पाय – पाद,पद,चरण


230.   पारिपत्य – शिक्षा,दंड,पराभव


231.    पुरुष – मर्द,नर


232.   पुढारी – नेता,नायक,धुरीण,अग्रणी


233.    पूजा – सेवा,अर्चना,अर्चा


234.   पैसा – दाम


235.    पोपट – रावा,शुक,राघू,कीर


236.   पोरका – आई-बाप नसलेला,निराधार


237.    पंक – चिखल


238.   पंक्ती – ओळ,पंगत,रांग


239.   पंडित – विद्वान,शास्त्री,बुद्धिमान


240.   प्रकाश – तेज,उजेड


241.    पृथ्वी – धरणी,धरती,वसुंधरा,रसा,भू,धरा,क्षमा,मही,भूमी,धरित्री


242.   प्रजा – रयत,लोक,जनता


243.   प्रपंच – संसार


244.   प्रतीक – खूण,चिन्ह


245.   प्रगल्भ – शहाणा,प्रौढ,गंभीर


246.   प्रासाद – वाडा,मंदिर


247.    प्रताप – शौर्य,पराक्रम


248.   प्रघात – पद्धत,चाल,रिवाज,रीती


249.   प्रवीण – कुशल,पटू,निपुण,हुशार,निष्णात,तरबेज


250.   प्राचीन – पुरातन,जुनाट,पूर्वीचा


251.     प्रात:काळ – उषा,पहाट,सकाळ


252.    प्रेम – लोभ,स्नेह,माया,प्रीती,अनुराग


253.    पर्वत – नग,गिरी,अचल,शैल,अद्री


254.   फूल – सुमन,सुम,कुसुम,पुष्प


255.    बहर – सुगी,हंगाम


256.   बक – बगळा


257.    बळ – शक्ती,जोर,ताकद,सामर्थ्य


258.   बाग – उद्यान,उपवन,बगिचा


259.    बाप – पिता,वडील,तात,जन्मदाता,जनक


260.   बाण – शर,तीर,सायक


261.    बिकट – कठीण,अवघड


262.   बेडूक – दर्दुर,मंडुक


263.   ब्राह्मण – द्विज,विप्र


264.   ब्रह्मदेव – विधी,चतुरानन,प्रजापती,कमलासन,ब्रह्मा,विरंची


265.   बांधेसूद – सुडौल,रेखीव


266.   बेढब – बेडौल


267.    बैल – पोळ,खोंड,वृषभ


268.    बंधन – मर्यादा,निर्बंध


269.   बंधू – भ्राता,भाऊ


270.   ब्रीद – प्रतिज्ञा,बाणा


271.     भगिनी – बहीण


272.    भरवसा – खात्री,विश्वास


273.    भरभराट – चलती,समृद्धी,चलती


274.     भार – ओझे


275.    भाऊ – भ्राता,सहोदर,बंधू


276.     भान – जागृती,शुद्ध


277.    भांडण – झगडा,कलह,तंटा


278.     भाऊबंद – सगेसोयरे,नातेवाईक,आप्त


279.    भांडखोर – कलभांड,कलांट,कळाम,कलागती,कलाझंगडी


280.   भुंगा – भृंग,अलि,भ्रमर,मिलिंद,मधुप


281.    भू – धरा,भूमी,जमीन,धरित्री,धरणी


282.   भेद – भिन्नता,फरक


283.    भेकड – भीरु,भ्याड,भित्रा


284.   महिमा – मोठेपणा,थोरवी,माहात्म्य


285.   मनसुबा – विचार,बेत


286.   मकरंद – मध


287.    महा – मोठा,महान


288.   मलूल – निस्तेज


289.   मंदिर – देवालय,देऊळ


290.   मयूर – मोर


291.    मत्सर – असूया,द्वेष


292.    मार्ग – वाट,सडक,पथ,रस्ता


293.   माणूस – मनुज,मनुष्य,मानव


294.   मानव – माणूस,नर,मनुष्य,मनुज


295.   मित्र – सखा,स्नेही,दोस्त,सोबती,सवंगडी


296.   मासा – मत्स्य,मीन


297.    मित्र – स्नेही,सोबती,दोस्त,साथीदार,सवंगडी


298.   मुलामा – लेप


299.   मुलगा – आत्मज,सुत,लेक,पुत्र,नंदन,तनय,तनुज


300.  मुलगी – आत्मजा,तनया,पुत्री,दुहिता,सुता,कन्या,तनुजा,नंदिनी


301.    मूषक – उंदीर


302.   मेष – मेंढा


303.   मोहिनी – भुरळ


304.   मौज – गंमत,मजा


305.   मंगल – पवित्र


306.   याचक – भिकारी


307.   यज्ञ – मख,याग,होम


308.   यातना – दु:ख,वेदना


309.   यान – अंतराळवाहन


310.    युवती – तरुणी


311.     युद्ध – लढाई,रण,संग्राम,समर,संगर


312.    रक्त – असु,रुधिर,शोणित,असुत


313.     रात्र – यामिनी,रजनी,निशा,रात


314.    रस्ता – वाट,पथ,मार्ग


315.     रागीट – संतापी,कोपी,कोपिष्ट


316.    रुक्ष – नीरस,कोरडे


317.     राजा – भूपती,नरेश,नरेंद्र,भूपाल,नृप


318.     राग – क्रोध,रोष,त्वेष,संताप,कोप


319.    रयत – प्रजा,जनता


320.   रोष – राग


321.    रंक – गरीब


322.   लढा – संघर्ष,लढाई


323.   लाज – भीड,शरम


324.   लक्ष्मी – कमला,रमा,वैष्णवी,श्री,इंदिरा


325.    लाडका – आवडता


326.   लावण्य – सौंदर्य


327.    वर – भ्रतार,नवरा,पती


328.   वल्लरी – लता,लतिका,वेल


329.   वंदन – प्रणाम,नमन,नमस्कार,प्रणिपात,अभिवादन


330.   वर्षा – पावसाळा,पाऊस


331.    वचक – दरारा,धाक


332.   वस्त्र – वसन,कपडा,अंबर,पट


333.   वत्स – बालक,वासरू


334.   वारा – वात,वायू,मरुत,अनिल,समीर,पवन,मारुत,समीरण,हवा


335.    वासना – इच्छा


336.   वाली – कैवारी,रक्षणकर्ता


337.    वानर – मर्कट,कपी,शाखामृग,माकड


338.   वायदा – करार


339.   विलंब – उशीर


340.   विष्णू – रमेश,रमापती,मधुसूदन,चक्रपाणि,नारायण,केशव,हृषीकेश,गोविंद,पुरुषोत्तम


341.    विमल – निर्मळ,निष्कलंक


342.   विवंचना – चिंता,काळजी


343.   विद्रूप – कुरूप


344.   विनय – नम्रता


345.   विस्तृत – विस्तीर्ण,विशाल


346.   विस्मय – नवल,आश्चर्य


347.    विहार – सहल,क्रीडा,भ्रमण


348.   विलग – अलग,सुटे


349.   विषण्ण – कष्टी,खिन्न


350.   वीज – चंचला,सौदामिनी,चपला,तडिता,विद्युल्लता,विद्युत


351.     वेश – पोशाख


352.    व्यथा – दु:ख


353.    व्रण – क्षत,खूण


354.   व्याकूल – कासावीस,दु:खी


355.    शव – प्रेत


356.   शंकर -महेश,महादेव,निळकंठ,रुद्र,सांब,महेश,भालचंद्र,त्रिनेत्र,दिगंबर,शिव


357.    शक्ती – जोर,बळ,सामर्थ्य,ताकद,ऊर्जा


358.   शर – तीर,बाण,सायक


359.   शत्रू – रिपू,अरी,वैरी,दुश्मन


360.   शेज – अंथरूण,शय्या,बिछाना


361.    शिकारी – पारधी


362.   शिक्षक – गुरु,मास्तर,गुरुजी


363.   शीघ्र – जलद,लवकर


364.   शीण – थकवा


365.   शेतकरी – कृषीवल,कृषक


366.   शेष – अनंत,वासुकी


367.    शिकस्त – पराकाष्ठा


368.   सज्जन – संत


369.   सह्याद्री – सह्याचाल,सहयगिरी


370.   समाधान – संतोष,आनंद


371.     समुद्र – सिंधू,रत्नाकर,सागर,जलनिधी,जलधी,पयोधी,उद्धी,अंबुधी


372.    समय – वेळ


373.    सकल -  अखिल,समस्त,सर्व,सगळा


374.    सनातनी – कर्मठ


375.    साप – भुजंग,सर्प,अही


376.    संहार – विनाश,नाश,विध्वंस,सर्वनाश


377.    स्वच्छ – साफ,निर्मळ,नीटनेटका


378.    स्तुती – कौतुक,प्रशंसा


379.    साधू – संन्यासी


380.   साथ – संगत,सोबत


381.    सुगम – सोपा,सुकर,सुलभ


382.   सुरेल – गोड


383.   सोने – हिरण्य,कांचन,कनक,हेम,सुवर्ण


384.   सुंदर – छान,देखणे,सुरेख,मनोहर,रम्य,रमणीय


385.   सीमा – मर्यादा,शीव,वेस


386.   सेवक – नोकर,दास


387.    सैन्य – दल,फौज


388.   संघ – चमू,समूह,गट


389.   संशोधक – शस्त्रज्ञ


390.   संदेश – निरोप


391.    संघर्ष – टक्कर,कलह,झगडा,भांडण


392.   संकल्प – मनसुबा,बेत


393.   स्वामी – मालक,धनी


394.   स्वेद – घर्म,घाम


395.   सूर्य – भास्कर,रवी,आदित्य,भानू,दिनमणी,दिनकर,वासरमणी,सविता,मित्र,मार्तंड,चंडांशू


396.   संग्राम – समर,संगर,लढाई,युद्ध


397.    संशय -शंका


398.   संहार – विनाश,नाश,सर्वनाश


399.   सिंह – केसरी,वनराज,मृगेंद्र,पंचानन,मृगराज


400.  स्त्री – वनिता,महिला,नारी,कामिनी,ललना,अबला


401.    हताश – निराश


402.   हरिण – कुरंग,सारंग,मृग


403.   हत्ती – कुंजर,गज,नाग,सारंग


404.   हात – हस्त,पाणि,कर,बाहू,भुजा


405.   हिम – बर्फ


406.   हिरमोड – विरस


407.   हिंमत – धाडस,धैर्य


408.  ह्रदय – अंत:करण,हिरित,अंतर


409.   हुशार – चाणाक्ष,चतुर,चलाख,कलमतारश,कसबी


410.    होडी – नौका,तर,नाव


411.     क्षत – माफी


412.    क्षय – ह्रास,झीज


413.    क्षीण – अशक्त


414.    क्षीर – दूध


415.    क्षुधा – भूक


416.    क्षेम – हित,कल्याण,कुशल


417.     क्षोभ – क्रोध 

Saturday, 26 March 2022

अ ते ज्ञ पर्यंत जोडून येणारे शब्द व त्यांचे अर्थ

 जोडून येणारे शब्द व त्यांचे अर्थ


अ ते ज्ञ पर्यंत.....


अकट चिकट - चोरवंदळ

अकट विकट - अतिशय मोठा

अकडं तिकडं - अव्यवस्थित

अकरनकर - हट्टी, दुराग्रही

अकराळ विकराळ - भयंकर (अक्राळ विक्राळ)

अकांड तांडव - रागाने ओरड

अक्कल बाज - हुशार

अगट विगट - मंद, आळशी

अगड तगड - क्षुल्लक वस्तू (सटरफटर)

अगड तबड - शिळेपाळे, जाडे भरडे अन्न

अगल्या बगल्या - आश्रित

आग्निपरीक्षा - अग्निदिव्य

अगापिछा - संबंधी

आग्निपात्र - इस्रीचे यंत्र

अग्नियंत्र - बंदूक, तोफ

अघळ पघळ - ऐस पेस, सेल

अंगत पंगत - मुलांचा एकत्र जेवणाचा प्रकार

अचकट विचकट - वाईट, अश्लील

अचक बोचक - गेर पद्धतीने, अस्ताव्यस्त

अचकल दचकल - वाईट अन्न

अचका विचका - गोंधळ, गुंतागुंत

अचका गचका - धसका, अपस्मार, फेफरे यांनी बसणारा हिसका

अचट बोचट - अर्धे मुर्धे कमी जास्त

अचडे बचडे - लाडके मूल

अचरट प्चरट - कोरडे, बेचव

अजात शत्रू - शत्रू नसलेला

अटक चटक - चेष्टा, रवेळ

अटक मटक - र्वेळ

अटपा आटप - आवराआवर, निरवानिरव

अटाअट - वाण, उणीव. टंचाई

अटापीट - छळणूक, गांजणूक

अटांग पटांग - लांबलचक

अठोनी वेठोनी - पीळदार

आटापाणी - पीठ व पाणी, रोजचा शिधा

आटोकाट - पराकाष्ठेचा, अत्यंत, पूर्ण

आट्या पाट्या - एक महाराष्ट्रीय रवेळ

आणिबाणी - संकट प्रसंग

आदळ आपट - आदळणे व आपटणे, आपटा आपटी

आनंदी आनंद - रवृप आनंद

आपट धोपट - आपटणे, आपटा आपटी

आंबट गोड - आंबट व गोड यांचे मिश्रम

आबड धाबड - ओबड धोबड, बेडोल

आबळा गोबळा - सर्व दिशास व्यापून असणारा

आबादी आबाद - भरभराट

आंबट चिंबट - आंबट

आयात निर्यात - आवक जावक

आयाबाया - शेजारणी पाजारणी

आकड निवड - पसंती, आवड नावड

आमने सामने - समोरा समोर

आवळे जावळे - जुळे

आरोह-अवरोह - चढ-उतार

आलीगेली - नफातोटा, जमारवर्च

आवक्‍्ट चाक्ट - भसते सलते

आवती भोवती - आजूबाजूला, आसपास

आस्कळ विस्कळ - ऐसपेस

आस्कार हुस्कार - हुंदके देणे, श्वासोच्छवास

आशानिराशा - इच्छा-अनिच्छा

आहाळबाहाळ - संपूर्ण, विस्तीर्ण

आळसमळस - ऐसपेस

आळाटाळी - ढिलाई, चेंगटपणा

आळाटोळा - अंदाज

इकडे तिकडे - आजुबाजूला, येथेतेथे

इवले इवले - लहान

इन मिन साडेतीन - छोटा संसार

इमाने इतवारे - प्रामाणिकपणाने, एकनिष्ठेने

इडा पिडा - दुःरवे, संकटे

उकसाबुकसी - ओऑक्साबोक्षी

उरवळा उरवळ - विस्कटणे, मोकळे करणे

उरवाळी पारवाळी - वैगुण्य, दोष, कमीपणा

उगरा बागरा - उग्र, कू, भयानक

उगवित पागवित - सोईसोईने, थोडेथोडे

उघडा बोडका - रवुला, मोकळा, नागवा

उघड वाघड - उघडपणे, प्रसिद्धपणे

ऊचकळ्या बुचकळ्या - बुडत्या माणसाच्या पाण्यातील गटांगळ्या

उचका उचक - घाईने ओढणे, फसविणे

उचमपचम - उठाठेव

उचलबांगडी - हकालपट्टी करणे

उचला उचल - घाईने सामानाचे स्थलांतर करणे

उजळ पाजळ - स्वच्छ, सतेज

उजवा डावा - फरक

उजूबुजू - आदर, मान, मर्यादा

उटाउटी - उठाउठी, तात्काळ, त्वरेने

उठसूट - कारणाशिवाय करण्याची क्रिया

उठाठेव - रवटपट

उडतउडत - अस्पष्टपणे

उडवा उडवी - टाळाटाळी, उधळपट्टी

उतळपातळ - गप्पा, प्रौढी

उत्तमोत्तम - उ्त्क्ट

उत्तरोत्तर - क्रमाक्रमाने, हळूहळू

उतळपातळ - थोडेथोडे

उन्हातान्हाचा - भर दोन प्रहरचा

उधळ माधळ - उधळेपणा

उधार उसनवार - बिनव्याजी कर्ज

उपज निपज - जन्म आणि वाढ, उदय आणि प्रगती

उपासतापास - कडक त्रत, व्रतनियम

उरलासुरला - शिल्लक राहिलेला

उलगा उलग - आवराआवर, समाप्ती

उलाघाल - उलाढाल, क्रांती

उलटा पालटा - उलथा पालथा, गोधळ

उठता बसता - वेळी अवेळी

उष्टे खरकटे - जेवणानंतर पानात राहिलेले

उसने पासने - उसनवारी, उधारी

ऊन पाऊस - सूर्यप्रकाश व पाऊस

क्रषीमुनी - साधूसंत

एकट दुकट - एरवाद दुसरा, एकटाच

एकनिकी - एकी; जूट

एकमेक - परस्पर

एकमेळ - ऐक्य

एकांती लोकांती - गुप्त किंवा प्रकट, रवाजगी किंवा सार्वजनिक

एकलकोंडा - एकांताप्रिय

एडगुळ बेडगुळ - ओबडधोबड

एरडबेरड - बेडोल

ऐशआराम - चैन, सुरव, ऐष आराम

ऐलपेल - या व त्या बाजूचा

ऐलतीर पैलतीर - या व त्या बाजूचा किनारा

ऐसपेस - विस्तीर्ण, प्रशस्त

ओकसाबोकशी - मोठ्याने हेल काढून रडणे

ओघळ निघळ - वेडा वाकडा प्रवाह

ओढाओढ - रवेचारवेच, गर्दी

ओढाताण - पैशाची टंचाई

ओढून ताणून - कसेतरी, कष्टाने

ओबड धोबड - वेडेवाकडे, बेढव

ओवळा सोवळा - अपवित्र-पवित्र

ओळरव पाळरव - परिचय

ऑडक चोडक - ओबडधोबड, लहान मुलांचा रवेळ

ओर॒स चोरस - सभोवार, भोवती

ओषध उपचार - वैद्यकीय उपचार

अंरवण पंरवण - धान्याप्रमाणे पसरणे

अंगकाठी - अंगाची ठेवण, देहयष्टी

अंथरुण पांघरूण - बिछाना व पांघरायचे वस्त्र

अंधार कोठडी - एकांत वासाची शिक्षा देण्याची रवोली

अंडाळ बंडाळ - अव्यवस्था, गेरसोय

कडनिकड - निकडीचा प्रयत्न

कडाफोड - आदळ, आफ्ट

कच्ची बच्ची - लहान मुले

कडी कोयंडा - दाराची कडी

कडी कुलपे - दाराची कडी व कुलूप

कमी अधिक - कमी जास्त

कडे लोट - ऱ्हास, शिक्षा म्हणून डोंगर कड्यावरून ढकलणे

कपडालत्ता - कापडचोपड, वस्त्र, काफ्ड

कडोकडी - जोराने, नेटाने

कमजादा - कमी जास्त, कमी अधिक

करार मदार - वचन, बोली

कर्मकांड - धर्मरकर्म

कर्मयोग - दैव, योगायोग

कर्मकथा - दु:रवद कहाणी

कर्मकटकट - कंटाळवाणे, तापदायक

कर्मसंन्यास - कर्माचा त्याग

कर्ण कटू - कर्कश, कठोर

कलाकोशल्य - कलाकुसर. कलेत नेपुण्य

कर्मधर्म - वर्तन, कृत्य

कसाबसा - मोठ्या कलाने, प्रयासाने

कसकसणे - अंग दुरवून येणे

कहिबहि - कधीमधी, कधीतरी

कागद पत्र - पत्र, चिठ्ठी इ.

काऊ-चिऊ - कावळा चिमणी, लहान सहान

काट कसर - काटाकाट, रवर्च कमी करणे

काटे कुटे - बारीकसारीक लाकडे, अडथळा

काटेकोर - बारीक, सूक्ष्म, व्यवस्थित

काथ्याकूट - निरर्थक चर्चा, वाद

कानाडोळा - दुर्लक्ष

कानामात्रा - अक्षर चिन्हे

कांदा भाकरी - जेवण, गरिबांचे जेवण

कानीकपाळी - अरवंड (ओरडणे)

कानाकोपरा - सर्वत्र. कानाकोचा

काबाडक - मेहनत, श्रम

काम काज - लहान मोठे काम

काडी-कुटका - गवताचा तुकडा, अल्पशी गोष्ट

कामधंदा - उद्योग

कामचलाऊ - तात्पुरता उपयोगी पडणारा

कामचुकार - काम चुकविणारा

कामसाधू - स्वार्थी

कायदा कानून - न्याय

कार्यकर्ता - लोकांची सेवा होसेने करणारा

कार्यतत्पर - कार्यात निमग्न

कालवा कालव - ढवळा ढवळ, घोटाळा

कातत्रयी - कधीही नाही

काल पुरुष - यम

कावरा बावरा - भयभीत, गोंधळलेला

काळासावळा - सावळा

काळ झोप - मृत्यूच्या वेळची झोप

काळरात्र - भयंकर संकटाची रात्र

काळवेळ - वेळकाळ, समय

काळ पुरूष - यम, त्यासाररवा क्रूर पुरुष

काही बाही - थोडेसे, भलतेच

किडूक मिडूक - बारीक सारीक दागिने

किडा मुंगी - जीवजंतू

कुच कामाचा - अगदी निरुपयोगी

कुजबुजणे - हळूहळू बोलणे

कुरबुर - धूसपस, तंटा

कुल परंपरा - चाल, रीत

केरकचरा - केराप्रमाणे निरुपयोगी पदार्थ

केरकसपट - अगदी क्षुल्लक वस्तू

केर पोतेरे - झाडलोट, पाणी भरणे इ.

केरवारे - केरकचरा

केरपाणी - झाडलोट

कोड कोतुक - कोतुक, लाड, आवड

कोकण पट्टी - कोकण किनारा

कोलवा कोलव - चुकवा चुकव, टाळाटाळ

खटाटोप - मोटी तयारी, बेत

खबरबात - समाचार, बातमी

रक्‍डी सारवर - रक्‍डे जमलेली सारवर

खरेदी विक्री - माल रवरेदी करून तो परत विकणे

खडा जंगी - जोराचे भांडण, लढाई

खाचरवळगे - चढउतार, विषमता, रवाचरवोच

खाणाखुणा - संकेत, आठवणीचे चिन्ह

खातर जमा - रवात्री, विश्‍वास

खालोरवाल - योग्यतेने किंचीत कमी

खापरतोड - निपणतूचा/पणतूचा मुलगा (नातवाचा किंवा नातीचा नातू)

ख्याली खुशाली - स्वस्थता, गंमत

खाऊन पिऊन - तृप्त, रवाऊन पिऊन समाधानी

खाणे पिणे - अन्न, भोजन, सवाद्य पदार्थ इ.

खारीक रवोबरे - सुका मेवा

खेळी मेळी - सलगी

खेळ रवंडोबा - नाश

खोटेनाटे - असत्य

खोगीर भरती - व्यर्थ लोकांची भरती

गप्पागोष्टी - रिकामपणाच्या गोष्टी

गगन मंडल - आकाशाची पोकळी

गणगोत - नातेवाईक, सोयरेधायरे

गल्लीबोळ - लहान रस्ता

गडबड गोधळ - धांदल

गद्धे पंचविशी - तारुण्याचा काळ

गरम नरम - फार थंड व फार गरम नसलेले

गण मेत्री - जन्म पत्रिकेतील गणांमधील मेत्री

गर्भ श्रीसंत - जन्मापासून श्रीमंत

गरीब गुरीब - गोरगरीब

गंगा जमुना - अश्रू

गंगा भागीरथी - वयस्क विधवा, गंगेचे पवित्र पाणी

गज-घंटा - हत्तीच्या गळ्यातील घंटा

गंमत जंमत - चेन, मजा

गृहकलह - घरगुती तंटा

गाईगुरे - गुरे

गाई वासरू - गुरे

गाठ भेट - भेटी

गाडी-घोडा - वाहन

ग्राम देवता - गावचा प्रमुरव कुलदेव

ग्रहगती - ग्रहांचा वाईट परिणाम

ग्रामपंचायत - गावची व्यवस्था पाहणारी संस्था

गारेगार - अतिशय गार

गुरू-दक्षिणा - विद्याभ्यास संपल्यावर गुरूस द्यावयाची देणगी

गुरू-संप्रदाय - गुरुमार्ग, गुरूने घालून दिलेली परंपरा

गुंता गुत - घोटाळा, गोधळ

गुरे ढोरे - गुरे

गुजगोष्ट - गुपित

गैरवाजवी - अयोग्य, अन्याय

गेर फायदा - अयोग्य फायदा

गेर समजूत - चुकीची समजूत

गेर सोय - अडचण. त्रास

गेर मसलत - मूर्वपणाचा बेत

गोर गरीब - गरीब व दरिद्री

गोरा गोमटा - सुंदर रुपाचा

गोब्राह्मण - गाय आणि ब्राह्मण, गरीब ब्राह्मण

गोरा मोरा - पांढरा पडलेला

गोरक्षण - कसायापासून गाय वाचविणे

गोडी गुलाबी - भलेपणा, मेत्री

गोड धोड - गोडाचे जेक्ण

गोपाळकाला - सर्वाचे जेवण्याचे डबे एकत्र करणे

गोळाबेरीज - तात्पर्य, सारांश

गोरापान - अतिशय गोरा

गोडबंगाल - लबाडी, युक्‍ती, रहस्य

घरदार - घर व संसार

घर कोंबडा - नेहमी घरात राहणारा

घर बार - घरदार, प्रपंचाचा पसारा

घायकुती - उतावळेपणा

घाई गर्दी - अगदी गडबड, गर्दी

घातपात - ठार मारणे, नाश

घाई गडबड - अगदी गडबड, घाई घाईने

घुसळ रवांब - दही घुसळण्यासाठी रवी ज्याला बांधतात तो रवांब

घेवाण देवण - व्यवहार

घोडा गाडी - घोड्याची गाडी

घोडा मेदान - परीक्षेची कसोटी

घोडे बैल - घोडे व बैल

घोडचूक - अक्षम्य चूक

घोडकुदळ - उपवर झालेली पण लग्न न झालेली मोठी मुलगी

चकडमकड - सोंगढोंग, चालढील

चकनाचूर - सत्यानाश, नायनाट, चकाचूर, पूड, भुगा

चकरमकर - युक्‍त्या, डावपेच

चक्का चक्की - उघड भांडण, हमरी तुमरी

चक्रपाणी - सुदर्शन चक्क धारण करणारा विष्णू

चक्रीपुराण - एकाच बैठकीवरून अनेकांनी सांगितलेले पुराण

चंगीभंगी - दुर्व्यसनी

चट्टामट्टा - फडशा, रवाऊन संपविणे

चढउतार - कमी जास्त

चटणी भाकरी - गरीबांचे साधे जेवण

चंद्रप्रभा - एक ओषधी गोळी

चंद्रग्रहण - चंद्रास लागलेले ग्रहण

चंद्रमणी - एक काल्पनिक रत्न

चपलगती - वेग

चरणरज - पायधूळ

चरणतळ - तळपाय

चरणामृत - पायांचे तीर्थ

चलनवलन - चालणे, वागणे, हालचाल

चलबिचल - अस्थिरता

चवढव - गोंधळ, भानगड

चवल्यापावल्या - कच्चीबच्ची; मोड

चंबूगबाळे - भांडीकुंडी, सामानसुमान

चहाफराळ - चहा व नास्ता

चाटकेडुटके - रवेळण्यातील भांडीकुंडी, चूलबोळकी

चांडाळ चौकडी - चार वाईट माणसांचा समुदाय

चारा पाणी - गुरांचे रवाणे

चाल चलन - आचार, वर्तन, वागणूक

चांगले चुंगले - चांगलेसे

चिपुटचिंगळी - चिटपारवरू

चिरगुट पांघरूण - अथरापांघरायचे

चिवून चावून - काटकसरीने

चिठी (विटठी) चपाटी - लहानसे पत्र

चिरी मिरी - लहानशी लाच, बक्षिशी

चिरे बंदी - घडीव दगडाचे बांधकाम

चिली पिली - मुले बाळे

चिरकाल - दीर्घ काळ

चुकूनमाकून - निर्हेतुकपणे

चुरचोबडा - वटवट्या

चुडेदान - सोभाग्य

चुकला माकला - चुकून राहिलेला

चुनरवडा - चुन्याचा रवडा, निवडक रत्न, चपळ

चूकभूल - विस्मरणाने झालेला दोष

चेंगराचेगंर - चेपाचेपी

चेंदामेंदा - चुराडा, नाश

चेष्टा कुचेष्टा - टवाळकी

चेष्टा मस्करी - थटटा

चोरूनमारून - लपूनछपून

चोळामोळा - चुरडणे

चोरी चपाटी - चोरी, दरोडा

चोर बीर - चोर वगेरे, चोरविलटे

चोरी लबाडी - रवोटेपणा, कपटीपणा

छान छोकी - डामडौल, दिमारव

छिन्न विच्छिन्न - छिन्न भिन्न, अस्ताव्यस्त

छेलछबीली - नरवरेबाज, देरवणा

छोटा मोठा - लहान मोठा

जमीन जुमला - रवेडेगावातील जमीन

जड जवाहीर - सोने, रत्ने इ.

जनरूढी - लोकांची चाल, रीत

जन्मकुटाळ - कुचेष्टा करणारा

जपजाप्य - धार्मिक कृत्य, जपतप

जंतरमंतर - जादूटोणा

जन्म मरण - जन्म मृत्यू, जनन मरण

जन्म सावित्री - जन्मसवाशीण

जमीन दोस्त - सर्वस्वी नाश झालेला

जयस्तंभ - स्मारक म्हणून उभारलेला रवांब

जलप्रलय - सर्व पृथ्वी पाण्यात बुडून जाते तो काळ

जसा तसा - जसा येईल तसा, कसाबसा

जय विजय - विष्णूचे दोन द्वारपाल

जय पराजय - जीत व पराजित, हार जीत

जन जागरण - जन जागृती

जगजाहीर - प्रसिद्ध

जन प्रवाद - बाजारगप्पा, जनरीत

जन रीती - लोकांची प्रवृत्ती

जन्मगाठ - जन्मभर टिकणारा संबंध

जन्मदरिद्री - जन्मापासून दरिद्री

जय गोपाळ - नमस्काराचा पर्याय शब्द

जल क्रीडा - जलविहार

जातपात - जातगोत, जात जमात

जाती स्वभाव - जन्म स्वभाव, जातीनुसार स्वभाव

जाड जूड - लठ्ठ, धष्टपुष्ट

जाळपोळ - नासधूस

जाबजबाब - बोलण्याचे चावुर्य

जाणता अजाणता - कळत नकळत

जातकुळी - जात, वंशासंबंधी माहिती

जिरवाजिरव - निरवा निरव, छपवा छपवी

जीवश्च कंठश्च - जीवलग

जीव जंतु - लहान किडा

जुलूम जबरी - बलात्कार, जुलूम

जुना पुराणा - फार दिवस वापरलेली वस्तू, जुनवट, जीर्ण

झगडा बिगडा - वादविवाद, भांडण, तंटा

झाडे झुडपे - झाडांचा समुदाय (झाड झाडोरा)

झाड लोट - झाडून साफ करणे

झाड पाला - ओषधाच्या उपयोगी पाला, वनस्पती

झाकपाक - जेवणानंतरची उरली सुरली कामे

झुंजुक मुंजुक - पहाटेचा संधी प्रकाश, झुंजुमुंजू

झोंबा झोंबी - ओढाओढ, हिसकणी

टंगळ मंगळ - टाळाटाळ, चुकवा चुकव, बेपर्वाई

टकामका - निश्‍चलपणे, चकित होऊन

टकेटोणपे - अडथळे, संकटे

टाणा टोणा - जादुगिरी, मंत्रतंत्र

टापफटेप - उंचवटे, टेकाडे

टापटीप - सुव्यवस्था

टापस टीप - पुरेपूर, प्रसंगानुरूप

टाळाटाळ - भूलथाप, चालढकल

टोले जंग - मजबूत, बळकट

टोळभैरव - उडाणटप्पू, रिकामटेकडा

ठाकठीक - सुव्यवस्था, नीटनेटका, ठीकठाक

ठाकून ठोकून - प्रसंगानुरूप

ठाला ठेल - भरगच्च, रवच्चून भरलेले

ठाव ठिकाणा - पत्ता, मागमूस

ठायी ठायी - ठिकठिकाणी

ठेवरेव - भांडवल, संचय

ठोकतापीर - भांडरवोर

डरांव डरांव - बेडकाचे ओरडणे

डगमग - लटपट, डळमळीतपणा, अस्थिरता

डचमळणे - रवळबळणे, वर उसळणे

डबडबणे - अश्रूंनी भरून येणे

डायाडोल - भयभीत

डावपेच - रवेळातील खुबीदार डाव

डावाउजवा - व्यवहारोपयोगी चावुर्य

डाळ भात - साधे जेवण

डागडुगी - लहानसहान दरुस्ती

डाम डोल - डोलदार, छानछोकी, थाटमाट

डोळे मोड - नेत्र संकेत

डोंगर दरी - डोंगर व दरी असलेला भाग

डोंगर पठार - सपाट प्रदेश

ढकला ढकली - विनाकारण वेळ घालविणे

ढवळा ढवळ - उलाढाल, गोधळ

ढवळा पवळा - बैलांची जोडी

ढाल ढकल - चालढकल, दिरंगाई

ढाल-तलवार - लढाईची (मारामारीची) साधने

तन मन धन - सर्वस्व, शरीर मन व संपत्ती

तप्तमुद्रा - दीक्षा घेताना तांब्या पितळेच्या मुद्रा तापवून अंगावर चिन्हे उमटवितात

तर्क ज्ञान - अनुमान करण्याची शक्‍ती

तर्क कोशल्य - कल्पना करण्याचे चावुर्य

तडका फडकी - झटापट, तात्काळ, तरकाफरकी

तडफडाट - चडफडाट

तरवार बहादूर - शूर, रणगाजी (तलवार - तरवार)

तडजोड - सलोरवा, समेट

तप्तशूल - तापविलेला सूळ

तर्क व्ति्क - कल्पना, अनुमान, अंदाज

तर्क विद्या - वादविवादपटुता, अंदाज करण्याची कुशलता

तंटा बरवेडा - बोलाचाली, भांडण

ताट वाटी - जेवणाची तयारी

ताकडा तुकडा - लहान मोठा तुकडा

तारंतार - तंतोतंत, बरोबर

तारतम्य - श्रेठ कनिष्ठ भाव. बरेवाईटपणा

ताळमेळ - देश काल इ. चा मेळ

तान मान - योग्य व अनुकूल परिस्थिती

तांब्या पेला - पाणी पिण्यास लागणारी भांडी

ताजा तवाना - प्रफुल्ल, टवटवीत

तिरव्ट मीठ - मीठ मसाला

तिरसट - विडरवोर

त्रिमूर्ती - ब्रह्मा, विष्णू, शंकर या तिघांचा मिळून झालेली मूर्ती

त्रिभूवन - स्वर्ग, मृत्यू व पाताळ हे तीन लोक

त्रिवर्ग - तिघेजण, उत्कर्ष, साम्य, ऱ्हास ह्या तीन अवस्था, तीन पुरुषार्थ

तेल फणी - केस नीट करणे, केस विंचरणे

तेज:पुंज - तेजस्वी

तेरी मेरी - हमरी तुमरी, अरेतुरेवर आलेले भांडण

तैल वित्र - तेलाच्या रंगांनी काढलेले वित्र

तोळामासा - थोड्या प्रमाणात

तोडमोड - किडुकमिडुक, मोडकी-तोडकी

त्रेधा तिरपीट - ओढाताण, तारांबळ

जंतर मंतर - जादूटोणा, मंत्रतंत्र

थकला भागला - दमलेला

थय थय - आनंद, मोज किंवा राग व्यक्‍त करण्यासाठी नाचणे

थांग पत्ता - सुगावा, ठाव

थातूर मातुर - अर्थहीन, निरर्थक

थाटमाट - डोल, डामडौल

थोडा थोडका - अल्प प्रमाणात

दगडधोंडा - दगड

दगाबाजी - कपट, ठकबाजी

दगेबाज - अप्रामाणिक

दगा फटका - कपट, लबाडी

दम छाट - श्‍वासोच्छवास निरोधनाची शक्‍ती

दमदाटी - धाकदपटशा

दळण कांडण - मोलकरणीची घरातील ढोबळ कामे

दहीभात - दह्यात कालविलेला भात

दंगामस्ती - गडबड, गोंधळ

दडप शाही - अरेरावी, जुलमी अंमल

दरी दरडी - उंच सरवल

दस्तऐवज - हक्‍क पत्र, प्रमाण पत्र

दर्या सारंग - नावाडी, रवलाशांचा नायक

दस्तरवत - सही

दळण वळण - परिचय, व्यवहार

द्ादृष्ट - नजरानजर, परस्पर दर्शन

दंत कथा - लोककथा, शास्त्रप्रमाणविरहित गोष्ट

दाणा पाणी - निर्वाह, पोट भरणे

दाणा गोटा - धान्यधुन्य,. डाळी

दाणादाण - सेरावेरा पळणे, पांगापांग

दान धर्म - परोपकाराची धार्मिक कृत्ये

दानशूर - दानवीर, दान देण्यात शूर

दावेरवोरी - शत्रुत्व, वेर

दान धर्म - पुण्यासाठी कलेले दान

दाग दागिने - अलंकार

दान पात्र - दान देण्यास योग्य

दातकडी - दातरिवेळी

दिवाबत्ती - दिवे

दिलदारी - उदारता

दिलहवाल - अस्वस्थ

दिवसा ढवळ्या - भरदिवसा

दिवाळी दसरा - सणाचा दिवस

दीन दुःरवी - दीन दुबळे, केविलवाणा, अनुकंपनीय

दिवस रात्र - सतत

दुजाभाव - मनाचा दुटप्पीपणा, आत एक बाहेर एक अशी वृत्ती

दध दुभते - दृध, दुभते पदार्थ

द्रदृष्टी - कुशाग्र बुद्धी

दुराचरण - निंद्य. वाईट वागणूक

दध भात - दध आणि भात, मेजवानीच पण विनयाने उल्लेर करण्याचा शब्द

देवाण घेवाण - देवघेव, व्यवहार

देवर्धर्म - धार्मिक कार्य, नवस करणे, देवपूजा

देवदानव - सुरासुर

देव देवता - देवता, परमेश्‍वर

देव दर्शन - देवाचे दर्शन

देव क्रषी - देवर्षी, नारद

दैवगती - नशीब

धकाबुकी - धक्का डुक्की, धक्के व बुक्के यांचा मार

धडधाकट - शाबूत, अव्यंग

धनदौलत - संपत्ती, मालमत्ता

धरपकड - गुन्हेगार, चोर यांना पकडण्याची क्रिया

धरसोड - चंचलता, अस्थिर

ध्ष्ट्पुट - गुबगुबीत, निकोप, धटटाकटटा

धरतीमाता - भूमाता, जमीन

धनुष्य बाण - ऐतिहासिक काळातील लढाईचे साधन

धर्मरकर्म - आचार, वर्तन

धर्मयुद्ध - न्याय युद्ध, निष्कपट युदृध

धनधान्य - संपत्ती, घरदार, मालमत्ता इ.

धागादोरा - संबंध, पत्ता

धावाधाव - पळापळ, घाईने इकडे तिकडे पळणे

धान्य धुन्य - भात, गहू, ज्वारी इ. धान्य

ध्यानीमनी - अंत:करणातील सर्व अवस्था व्यापणे

धावत पळत - अतिशय वेगाने, लवकर

धांगड धिंगा - गोंधळ, दांडगाई

धुमधडाका - गोंगाट, दणदणाट

धुमाकूळ - गोंधळ, दंगामस्ती

धेडगुजरी - अनेक भाषांची ख्विचडी

धोपट मार्ग - सरळमार्ग, परंपरागत चालत आलेली रीत, पफ्दधत

धोतर जोडी - दोन धोतरांची एक जोडी

नरवशिरवात - आपादमस्तक, सर्व शरीरभर, पायाच्या नरवापासून शेंडीच्या अग्रापर्यंत

नंगानाच - निर्लज्जपणाचे वर्तन

नजर बंदी - जाढुगिरी, हातचलारवी

नटूत थटूत - सजून, नटटापटटा करून

नंदीबैल - संकेताप्रमाणे वागणारा

नन्नाचा पाढा - प्रत्येक गोष्टीला नकार देणे

नरकुंजर - गणपती, नस्श्रेष्ठ

नफातोटा - फायदा व नुकसान

नदी नाले - लहान मोठे पाण्याचे प्रवाह

नगरवासी - शहरात राहणारे

नकार घंटा - नाकबूल करणे

नटवा नटवी - नरवरेबाज

नवरा बायको - दंपती, पती पत्नी

नवनवती - तारुण्याची आरंभदशा

नवरा नवरी - नवदंपती, वर आणि वधू

नगार रवाना - वाद्यांचा काररवाना, देऊळ

नव वघू - नवी नवरी

नव भूमी - नवीन भूमी, नवीन ठिकाण

नाव लौकिक - प्रसिद्धी, कीर्ती

नाक कान - अवयव

नामो निशान - अस्तित्व. नावकुल, संबंध

नाच गाणे - नाचगाण्याचा कार्यक्रम

न्याय नीती - न्याय निवाडा, न्याय, रवरेपणा

नावगाव - नाव निशाण, संबंध, नावकुल

निमक हराम - कृतघ्न, बेईमान

निमक हलाल - कृतज्ञ, विश्‍वासू

निशाणबाजी - नेम मारणे, वेध


निवासस्थान - घर


निम्माशिम्मा - अर्धेगुर्घे


निसर्ग रम्य - निसर्ग सोंदर्य, स्वाभाविक सॉंदर्य


निसर्ग प्रेम - निसगीवरील प्रेम


निज गुरव - स्वत:चे तोंड


निळे काळे - निळा व काळा रंग मिळून झालेला हिरवा रंग, निस्तेज


निळा शार - निळे शहर (शार-शहर)


निळा सावळा - सावळा


नेत्रपल्लवी - नेत्र संकेत, खुणेची भाषा


नोकर चाकर - सेवक, चाकर, दास


नोक झोक - नरवरा, थाटमाट


पडझड - मोडतोड


पही पाहुणा - वाटसरू, आतिथी, पे पाहुणा


पक्षपात - कैवार


पशुपक्षी - प्राणीमात्र


पळवा पळवी - पळापळ, धावाधाव


पहिला वहिला - प्रथमचा


पदोपदी - पावलो पावली, क्षणोक्षणी, वारंवार


पदर मोड - स्वत: रवर्च करून


पंचयज्ञ - पांच प्रकारचे यज्ञ, ब्राह्मणाने करावयाचे यज्ञ


पाऊल वाट - अरूंद वाट, पायवाट


पालापाचोळा - कचरा, निरर्थक वस्तू


पाटपाणी - जेवणाची तयारी


पांढरपेशा - उच्च वर्णीय


पाताळयंत्री - गूढ, कारस्थानी


पानसुपारी - विड्याचे साहित्य, पोस्त, लांच


पायपोस - चप्पल, पादत्राण


पायगुण - शुभाशुभ शकून


पांढऱ्या पायाचा - अपशकुनी, वाईट पायगुणाचा


पांढराफटक - निस्तेज


पालनपोषण - संरक्षण, सांभाळ


पावलोपावली - वेळोवेळी, पदोपदी


पाच पन्नास - थोडेसे


पाने फुले - देवाच्या पुजेसाठी फुले व पाने


पाऊस पाणी - पाऊस, पीक इ. पर्जन्यमान


पांढरा शुभ्र - अतिशय पांढरा


पालुपद - वारंवार म्हणणे, ध्रुपद


पाहुणा राउळा - पे पाहणा, पाहुणा बिहुणा, पाहुणा

पाठोपाठ - पाठीमागून, मागोमाग, लागोपाठ

पास नापास - निकाल

पाने बिने - पाने इ.

पांढरा कावळा - अप्राप्य वस्तू

पायपीट - विना कारण चालण्याचे श्रम

पिवळा जर्द - पिवळाधमक, अतिशय पिवळा

पिढ्यानपिढ्या - वंशपरंपरागत

पीक पाणी - पीक

पृसतपास - रवोल चोकशी

पेच प्रसंग - विपत्ती

पैसा अडका - पेसे, पे पेसा

पोरे बाळे - मुले

प्रसंगावधान - संकट समयी भांबावून न जाणे

फट फजिती - फजिती, अपमानकारक य्थिती

फसवा फसवी - फसवणूक

फंद फितुरी - दगलबाजी;, कारस्थान

फाटका तुटका - मोडका तोडका

फाकड पसारा - फापटपसारा, अवास्तव मांडलेला पसारा

फाटाफूट - वेगळे होणे, ताटातूट, विभक्त

फिरवा फिरव - उलटसुलट, उलथविणे, रवालीवर करणे

फुकट फाकट - फुकट, मोफत

फेर फटका - इकडे तिकडे फिरणे, भटकणे

फेका फेक - भिरकाविणे

फौज फाटा - सेन्य व त्या बरोबर असणारे लोक, साहित्य इ. फोज, सेन्य

बकध्यान - साध्ुत्वाचे ढोंग

बरे वाईट - मरण, नाश

बहिणभावंडे - भावंडे, बहीण भाऊ, जवळचे नातेवाईक

ब्रह्मघोटाळा - गोंधळ, आचारविचारांची अव्यवस्था

बनवा बनवी - एकमेकांना बनविणे

बाजारहाट - बाजार रवरेदी, बाजारपेठ

बापलेक - कडील व मुलगा किंवा मुलगी

बाग बगीचा - फुलबाग, मळा

बागुलबोवा - भीती वाटण्यासाठी उभे केलेले सोंग

बाजार डुणगे - फोजे बरोबर असणारी अवांतर माणसे

बाड बिछाना - बाड बिस्तरा, सामानसुमान

बाप जन्मी - सर्व आयुष्यात, जन्मापासून आजपर्यंत

बाल्यावस्था - बालपण

बाळी बुगडी - बारीकसारीक दागिने

बारीकसारीक - किरकोळ, बारीक

बाळगोपाळ - लहान मुले

बाळकडू - बाळघुटी, कडू ओषधे उगाळून पाजतात ते

बालबोध - सुलभ, सुबोध, लहान मुलांना समजेल असे

बाया बापड्या - बिचाऱ्या बायकांचा

बित्तवातमी - नक्की बातमी, बित्तं बातमी

बिनधोक - निश्‍चित

बिनडोक - विचार न करणारा, मूर्र्व

बिनतोड - बिनचूक, सर्वोत्कृष्ट

बीजारोपण - बी पेरणे

बुद्धी पुर:सर - मुद्दाम, जाणून बुजून

बेभरवशी - फसव्या

बेल भंडार - एक प्रकारचा शपथ विधी

बेरीज वजाबाकी - हिशेब

*बैल गाडी - बैल जोडलेली गाडी

बोलघेवडा - वाचाळ वटवट करणारा

बोलाचाली - संभाषण

भरत भेट - राम व भरत यांची भेट

भक्‍त वत्सल - भक्तावर अती प्रेम करणारा

भरमसाट - पुष्कळ, अमर्याद

भक्तीभाव - भक्तीयुक्त प्रीती, पूज्यतेचा भाव

भले मोठे - रवृप मोठे

भलतासलता - कोणीतरी, कोणतातरी

भात भाकरी - जेवण, (भाजी, भाकरी, पोळी इ.)

भाऊ बंदकी - बंधुत्वाची वागणूक

भाकड कथा - बाष्कळ गप्पा, कंटाळवाणी गोष्ट

भांडी कुंडी - सर्व प्रकारची भांडी

भाजी पाला - फळ भाजी व पाले भाजी, कंदमुळे इ.

भाकर तुकडा - भूक भागविण्यासाठी थोडेसे रवाणे

भाऊ भाऊ - भावंडे

भांडण तंटा - भांडण, कलह

भीड भाड - संकोच, पर्वा, मुर्वत

भुई सपाट - भुईस लागून, भुपृष्ठ

भूत पिशाच - भुते रवेते, मृतांची छाया

भेदाभेद - भेदभाव, परकेपणाची भावना, फरक

भोळाभाबडा - साधा भोळा, भोळासांब

भोसका भोसकी - मारामारी

मनकवडा - दुसऱ्यांचे मन वेधून घेण्याची शक्ती असलेला

मंत्र तंत्र - जादूटोणे, डावपेच

मराठा मोळा - मराठे लोकातील चालीरीती

मरतुकडा - अतिशय अशक्त मनुष्य, रोडका

मनमुराद - आनंददायक, मनसोक्त

मनमिळाऊ - सर्वांशी मिळून मिसळून वागणारा

मन:कामना - अंत:करणातील इच्छा

मनमोकळा - रवुल्या अंत:करणाने, संकोच सोडून

मर्कट चेष्टा - माकड चेष्टा, पोरकट चाळे

मागमूस - पत्ता, चाहूल

मान मरातब - आदर सत्कार, बहुमान

म्हातारा कोतारा - म्हातारा, वृद्ध, वयस्क

मातापितर - आईवडील, मातापिता

मारपीट - रवृप मारणे, मारहाण

मामा भाचे - नातेवाईक, मामा व भाचा

माया ममता - दया, माया, स्नेह, प्रीती

मायलेकी - आई व मुलगी, माय लेकरे, माय माऊली

मागे पुढे - आगे मागे, केव्हा ना केव्हा

मान अपमान - आदर-अनादर

माल मसाला - सामग्री, उपयुक्त वस्तू

मान पान - आदर सत्कार, मान सन्मान

मीठ भाकर - जेवण, गरिबीचे जेवण

मीठ मिरची - मसाला, चव आणणारे पदार्थ

मुले बाळे - लहान थोर सर्व मुले

मूठमाती - पुरण्याचा अंत्यसंस्कार

मेटाकुटी - महत्प्रयास

मेवा मिठाई - तऱ्हेतऱ्हेची फळे व मिठाई

मेलोमेल - रवृप दूरपर्यंत

मोडतोड - नासधूस

मोडका तोडका - मोडकळीस आलेला

मोल मजूरी - मजुरी घेऊन केलेली लोकांची कामे

यथाशक्ती - आपल्या शक्तीप्रमाणे

यथायोग्य - योग्य दिसेल तसे, अनुरूप, रुढीनुसार

यथाविधी - नियमानुसार

यथासांग - पूर्णपणे, कोणती ही गोष्ट कमी न करता

यथातथा - कसा तरी, कष्टाने, जेमतेम

यश अपयश - मानापमान, स्तुती किंवा निंदा

याता यात - हेलपाटा, त्रास, कष्ट

येर जार - येरझार, रवेपा, हेलपाटा

रक्त बंबाळ - रक्ताने मारलेला

रंगढंग - एकंदर देरवावा, युक्ती, चाळा

रंग रंगोटी - घर किंवा चेहरा रंगविणे

रत्न जडित - रत्ने बसविलेला


रमत गमत - घाई न करता, बिनत्रासाने, सहज


रहाट गाडगे - चांगली व वाईट परिस्थिती, नशीबाचे फेरफार, व्यवहार


रत्ने माणके - मूल्यवान रवनिज पदार्थ


रंगबहार - आनंदाची लुट, मोज, सुरव


रडत राऊत - रडवा मनुष्य, रडतराव


रडत रवडत - मोठ्या कष्टाने, रेंगाळत, नाइलाजाने


रंजलेले गांजलेले - पीडीत, दु:स्ित


रंगभंग - विरस, आनंदाचा नाश


रदबदल - मध्यस्थी, वाटाघाट


रानी वनी - जंगलात


रान फुले - जंगली फुले


राजा राणी - राजा व राणी, विनोदी जोडपे


राजे महाराजे - सम्राट, राजे व महाराजे


राग लोभ - दु:रव व आनंद


राम राज्य - न्यायाचे व प्रजेचे रक्षण करणारे राज्य


राष्ट्रद्रोह - राष्ट्राशी शत्रुत्व


रान पारवरे - रानातील पारवरे


राम रगाडा - गर्दी, पराकाष्टेची दाटी


राजे रजवाडे - राजे, संस्थानिक, सरदार इ.


राख रांगोळी - नाश, विध्वंस


राग रंग - रागाची लक्षणे


रिकाम टेकटा - निरुद्योगी


रीतभात - रीतीरिवाज


रूपलावण्य - सोंदर्य, बांधेसूदपणा


रूसवा फुगवा - हट्ट, राग आणि चरफड


रोखठोक - उधारीचा नसलेला (रोरव), स्पष्ट


रोगराई - लहानमोठे रोग


लघाळ मावशी - गप्पा मारणारी बाई


लपत छपत - चोरून, गुप्तपणे


लहान सहान - बारीक सारीक, हलका


लक्षावधी - लारवो


लग्नकार्य - लग्न समारंभ, मंगल कार्य


लता वेली - वेली


लघळ पघळ - अतिशय बडबड


लंबा-चोडा (वक्‍्डा) - लांबलचक


लग्न-बिग्न - लग्न आदि समारंभ


लहान थोर - लहान आणि मोठा


लाकूड फाटा - घर बांधण्यासाठी लागणारे लाकूड विटा इ.

लाजकोंबडा - लाजाळू, भिडस्त

लाजलज्जा - लाज, मर्यादा

लांडा कारभार - नसती लुडबुड, उठाठेव

लांब लचक - प्रशस्त, अवाढव्य

लांडी लबाडी - लहान मोठी लबाडी, फसवणूक

लालन पालन - सांभाळ, संगोपन

लाडी गोडी - लाडकेपणा

लाच लुचपत - लाच, अप्रामाणिकपणाची देवाण घेवाण

लाल भडक - अतिशय तांबडा

लागे बांधे - नातीगोती

लांब सडक - लांब रस्ता

लांडगे-कोल्हे - हिंस्त्र फ्शु

लुंगा सुंगा - बारीक, क्षुद्र, नालायक

लुळापांगळा - कमजोर, व्यंग असलेला

लेचापेचा - अशक्त, कमजोर

लेकरे बाळे - मुले बाळे

लोक-परलोक - इहलोक व परलोक

लोट पोट - लोळण, बेसुमार, मोज, आनंद

लोणकडढी (थाप) - समयानुसार ठेवून दिलेली (थाप), रोटी बातमी

लोणकळे (तूप) - ताजे साजूक (तूप)

वज्रघात - मोठी आपत्ती

वजन माप - प्रमाण

वरण भात - साधे जेवण

वर्ण धर्म - व्यवहार, जातीला योग्य असा आचार

श्रत वैकल्य - श्रताची अपूर्णता, नेम, त्रते

वर रवाल - उंचसरवल, विषम रीतीने

वर्णहीन - जातीहीन

वर्ण क्रम - अक्षरांचा क्रम

वृक्षवाटिका - बाग, उपवन

व्यथा वेदना - दु:स्व, वेदना

क्टहुकुम - ताबडतोब अमलात येणार्‍या कायद्याचे फर्मान

वडील धारा - घराण्यात शिस्त रारवण्याचा अधिकार असलेली व्यक्‍ती

वरचष्मा - वरचढपणा, वर्चस्व

वरदहस्त - मोठ्यांचा आशीर्वाद, वर देण्यासाठी उचललेला हात

वरदक्षिणा - वधूचा प्रिता वरास देतो ती रक्‍कम

वहिवाट - चाल, रीत, व्यवस्था

वाडवडील - पूर्वज, वडील माणसे

वास्तपस्त - विचारपूस

वाईटसाईट - निरुपयोगी, निरर्थक

व्यापार उदीम - व्यवहार, कामधंदा

वादळ वारे - तुफान

वाकडा तिकडा - वक्र

वाटा घाटी - चर्चा, वादविवाद, वाटाघाट

वाक्‌ बगार - कुशल, पटाईत

वाचाळ पंचविशी - बडबड लावणे

वाणसोदा - वाणसवदा, किराणा माल

वाजत गाजत - धुम धडाक्यात

वाजागाजा - प्रसिद्धी, गवगवा

वाटचाल - प्रवास

वादविवाद - चर्चा

वारे माप - प्रमाणाबाहेर. विसंगत

विघ्नसंतोषी - दुसऱ्यांच्या कामात विघ्न आलेले पाहून संतोष मानणारा

विचारपूस - वास्तपुस्त, चोकशी

विधिघटना - नशीब, प्रारब्ध, कर्मगती

वितंडवाद - अट्टाहासाने रवोटा पक्ष स्थापन करण्यासाठी वादविवाद

विनासायास - श्रमाशिवाय

विरहव्यथा - विरहामुळे, होणारे दु:रव

विल्हेवाट - उधळपट्टी, व्यवस्था, योग्य योजना

विश्‍वासघात - विश्‍वास दारववून फसवणूक, बेइमानी

विस्मय चकित - आश्रर्यचकित

वेडा वाकडा - वाकडातिकडा

व्यासपीठ - उच्चासन, पुराणिकांचे आसन

शत पावली - जेवाणानंतरच्या फेऱ्या

शरीर प्रकृती - शरीराची ठेवण, स्वभाव

शंरवशिंपले - समुद्रात राहणार्‍या काही प्राण्यांची घरे

शतमूर्र्व - अत्यंत मूर्र्व

शहाणा सुरता - बुद्धीमान, हुषार व देरवणा

शरीर यष्टी - शरीर ठेवण, अंगकाठी

शब्द पाल्हाळ - शब्दावडंबर, शब्दजाल

शर पंजर - बाणांचा पिंजरा, पलंग

श्रम जीवी - मेहनती

श्रमदान - समाजासाठी विनामूल्य कष्टाचे काम करणे

शिळापाका - उरलेसुरलेले जेक्ण

शिवाशिव - स्पृश्य व अस्पृश्य यांचा गोंधळ

शिकला सवरलेला - शिक्षण घेतलेला, शिक्षित

शिवण टिपण - शिवणकाम

शिरोमणी - मुकुटमणी, श्रेष्ठ इसम

शिपाईप्यादे - जासूद, सैनिक

शीघ्चकोपी - रागीट, तापट

शेजारपाजार - शेजार

शेठसावकार - सावकार, व्यापारी

शेंडेफळ - अरवेरचे मूल

शेती भाती - शेतीवाडी, शेती, शेत जमीन

शेला पागोटे - बहुमानाची वस्त्रे

शेणसडा - पाण्यात शेण घालून जमिनीवर शिंपडणे

शेळ्या मेंढ्या - पाळीव जनावरे, बुद्धिबळातील एक डाव

शे दोनशे - शंभर-दोनशे

षोडशोपचार - विधीपूर्वक केलेले काम, पूजेचा विधी

सकट निकट - एकूण सगळे

संगतीसोबती - स्नेही, दोस्त, संगतसोबत

सगा सोयरा - नातेवाईक, सगेसोबती, सगे संबंधी, सोयरा धायरा

सडपाताळ - किरकोळ अंगाचा, रोडका

सणवार - सणबीण,

सदलाबदल - अदलाबदल

समज उमज - पूर्ण जाणीव, ज्ञान

सर मिसळ - मिश्रण, एकत्रीकरण

स्वयंपाक पाणी - जेवण

सटरफटर - किरकोळ

सदा सर्वदा - नेहमी, सतत

सरळसोट - सरळ

सणसुदी - सणाचा दिवस

सडा सारवण - झाडलोट

समुद्रमंथन - समुद्र घुसळणे

वादविवाद - वाटाघाट

सल्यापसल्य - चांगळे वाईट

समुद्रमेरवला - पृथ्वी

सवतासुभा - स्वतःचे असे निराळे

सती सावित्री - पतिव्रता, साध्वी

सटी सामासी - क्वचित प्रसंगी, कधीतरी

सत्ययुग - चार युगातील पहिले युग, सुवर्णयुग,

सत्वनिष्ठ - सत्व न सोडणारा

सल्लामसलत - विचार विनिमय, हितवाद

सरसकट - सरासरी, एकत्रितपणे

सत्य-असत्य - रवरेरवोटे

सर्वसामान्य - सर्वास लागू होणारा

सारवरभात - सारवर व केशर घालुन केलेला भात

साद पडसाद - प्रतिध्वनी

साधाभोळा - सरळ, स्वभावाने गरीब

सागरतीर - समुद्रतीर, समुद्र किनारा

सांड लवंड - सांडासांड, सोडणे, पालथे करणे

साडी चोळी - स्त्रियांचा पोषारव

साज-शृंगर - थाटमाट, सजणे, नटणे

सारवर झोप - अरुणोदयाच्या वेळची झोप

साधा सिधा - सरळ, एकमार्गी, निष्कपट

सांज सकाळ - नेहमी

सामान सुमान - चीज वस्तू, सामग्री, साहित्य

स्नान संध्या - स्नान व संध्या, देवपूजा

सांग सुगरण - नुसती तोंड पाटील की करणारी

सांगा वांगी, सांगोवांगी  - ऐकीव गोष्ट

साधक बाधक - अनुकूल व प्रतिकूल, योग्य अयोग्य

सासुरवाडी - पत्नीचे माहेर

साळीमाळी - समाजातील काही वर्ग

साफसफाई - स्वच्छता, साफसुफी

साधुसंत - साधू आणि संत

स्त्री-पुरुष - पतीपत्नी, पुरुष व सिरिया

सुरव-सोहळा - आनंददायक प्रसंग

सुईदोरा - सुई आणि दोरा

सुकाळसोदा - अत्यंक स्वस्त मालाची देवघेव

सुरंगाठ - सहज सुटण्यासाररवी गाठ

सुतराम - जरासुद्धा (नाही)

सुदामपोहे - गरीब माणसाची भेट

सुतोवाच - सुचविणे, सांगण्यास किंवा बोलण्यास सुरवात करणे

सेवासुश्रूषा - आजारी माणसाची काळजी घेणे

सोनेनाणे - सोने व इतर किमती वस्तू

सोक्षमोक्ष - गुंतून पडळेल्या व्यवहाराचा काही तरी कायमचाशेवट करणे, मोकळीक

सोयरे सूतक - लागे बांधे

सोवळे ओवळे - शुद्धतेने राहण्यासाठी सोवळेपणाची स्थिती

हरीवदन - हरीचे नामस्मरण

हरिचंदन - केशर, पिवळा चंदन

हसवाहसवी - हास्य

हलकी सलकी - कमी दर्ज्याची, कमी प्रतीची

हवा पाणी - वातावरण

हळदीकुंकू - सोभाग्यदर्शक, हळद कुंकू

हसतरवेळत - मजेत, हासत बागडत

हरि पाठ - विठ्ठल भक्तीपर अभंग

हवा पालट - हवेत बदल

हमरीतुमरी - हंबरातुंबरी, जोराचे भांडण, हमरातुमरी

हकनाक - हकनाहक, विनाकारण

हर हुन्नर - प्रत्येक कोशल्य, कसब

हाड वैर - अत्यंत तीव्र व फार जुने वेर

हात घाई - अती घाई

हातचलारवी - हस्त चापल्य, नजरबंदीचा कारभार

हातानिराळा - हातावेगळे, घेतलेले काम संपविणे

हाल अपेष्टा - नाना प्रकारची संकटे, आपत्ती

हाव भाव - भावनादर्शक अभिनय

हृदय शून्य - निर्दय, क्रूर

हाल हवाल - हकीकत, वर्तमान, हालअपेष्टा

हाडी मासी - शरीराने, अंगकाठी, शरीर रचना

हास्य विनोद - थट्टा मस्करी

हिरवा-निळा - रंगाची छटा

हिरवा गार - गडद हिरवा

हिरवा पिवळा - रंगाची छटा

हेकेरवोर - हट्टी, दुराग्रही

हेवेरवोर - व्देशी, मत्सरी

हेवादावा(हेवादेवा) - शत्रूभाव, व्देश, मत्सर

हेबती गेबती - अजागळ

हैदोसदुल्ला - हैदोस, गोंधळ

होमहवत - होम, यज्ञ

होसमोज - चेन, इच्छा

क्षमा याचना - क्षमेची भिक्षा मागणे

क्षणोक्षणी - पावलो पावली, प्रत्येक क्षणास

क्षीरसागर - दुधाचा समुद्र

क्षेम कुशल - कुशल क्षेम समाचार

ज्ञान विज्ञान - शास्त्रीय ज्ञान

ज्ञानदीप - बुद्धीरूपी दिवा

ज्ञान कोश - ज्ञानाचा कोश (सिंग्रह)

ज्ञान अज्ञान - ज्ञान आणि अज्ञान

ज्ञान साधना - ज्ञान संपादन करणे

ज्ञान सागर - ज्ञान रूपी सागर

ज्ञान मंदिर - शाळा, ज्ञान प्राप्त होण्याचे ठिकाण

Sunday, 20 March 2022

ग्रामीण भागातला अस्सल वऱ्हाडी तडका म्हणजे गावगप्पा कथासंग्रह होय.

*ग्रामीण भागातला अस्सल व-हाडी तडका म्हणजे गावगप्पा कथासंग्रह*

     महाराष्ट्रामध्ये मराठवाड्यात मराठी, विदर्भात व-हाडी, कोकणात कोकणी, खानदेशात अहिराणी अशा मराठीची बोलीभाषा सर्वत्र वेगवेगळी बोलली जाते. व-हाडातली व-हाडीची एक खास वैशिष्ट्ये प्रकर्षाने दिसून येते ते म्हणजे व-हाडी भाषेतला अस्सल गोडवा, आपली बोली आणि मातीवर निस्सीम प्रेम करणारा व-हाडी बोलीच्या सौंदर्याने नटलेला रसास्वाद व-हाडी माणसाच्या व्यक्तिमत्त्वाला आणि बोलीला वेगळी ओळख देणारा लेखक म्हणजे संजय महल्ले यांचा ग्रामीण भागातला अस्सल वराडी तडका म्हणजे 'गावगप्पा' कथासंग्रह होय.
        अमरावती जिल्ह्याचे लेखक संजय महल्ले यांचा चौथा कथासंग्रह गावगप्पा नुकताच वाचनात आला. व-हाडी मातीशी नाळ जुळलेले लेखक, शहरी भागात जरी वास्तव्यास असले तरी ग्रामीण भागातली अस्सल वऱ्हाडी बोली लेखकाच्या नसानसात भिनली आहे. लेखक संजय महाल्ले यांचा जिथं जावं तिथं हा विनोदी कथासंग्रह, पुरुष हा दुसरा कथासंग्रह, शिक्षणाचा गोरखधंदा हा लेख संग्रह, पांचजन्य या साप्ताहिकातून सन २०१२- १३ साली गावगप्पा हे सदर सुरू केले आणि त्यातूनच गावगप्पा हा उत्कृष्ट कथासंग्रह जन्मास आला. संपूर्ण महाराष्ट्रातून वाचकाने गावगप्पाला प्रचंड प्रतिसाद दिला. अशा या कथासंग्रहाचे  प्रकाशन लेखकाचे स्वतःचे प्रकाशन असून ते मेधा पब्लिशिंग पब्लिशिंग हाऊस अमरावती यांनी प्रकाशित केले असून याची प्रथमावृत्ती १ऑगस्ट २०२० रोजी प्रकाशित झाली आहे. या कथासंग्रहाचे मुखपृष्ठ ग्रामीण भागातील गप्पा मारणाऱ्या कुटुंबाचे असून बांधणी  अतिशय दर्जेदार आहे. प्रस्तावना व पाठराखण डॉक्टर संजय लोहकरे यांची लाभली असून या कथासंग्रहाचे मूल्य केवळ १५० रुपये आहे. यातल्या सर्वच कथा वऱ्हाडी बोलीतील अस्सल मार्मिक विनोदी आणि वऱ्हाडी बोलीचे सौंदर्य असल्याने वाचकांचे भान हरपल्याशिवाय राहत नाही.
          व-हाडी बोलीतील विनोदी कथाकार संजय महल्ले यांचा गावगप्पा हा मराठी मातीतील दैनंदिन घटना, जगण्याच्या विविध त-हा, जीवन जाणीव, राजकारण, समाजकारण आणि मानवी नात्यातील उसवलेपणा अशा विविध प्रवृत्ती वर लेखकाने प्रकाश टाकला आहे. आग या कथेतून मंत्रालयाला लागलेल्या आगीत सर्व कागदपत्रे जळून गेली असं समजल्यावर म्हातारा म्हणतो पण त्यातले मंतरी-मुख्यमंतरी असा राजकारणावर मारलेला खोचक टोला या कथेतून लक्षात येतो. ग्रामीण भागातली मंडळी घरी राहायला साधीसुधी असली तरी त्यांना राजकारणातले सर्व कळते याच कथेतून सून सासूला म्हणते माझ्या ध्यानात एक नाही येऊन राहिलं कवाचं आपल्या घरातला इस्तो बराबर इजला का नाही ते आपण सत-यांदा पाह्यतो मग एवढ्या मोठ्या मंतरालयाले एवढी मोठी आग लागनच कशी? मलेतं वाटते काहीतरी कायबेरच हाय ह्यात. असा खोचक टोला सुनबाई मारताना दिसून येते.दुबार पेरणी या कथेतून दुष्काळाचा सामना करणारा हवालदिल झालेल्या शेतकर्‍यांचे भयान वास्तव दर्शवले आहे. शेतकरी निसर्गावर कसा अवलंबून आहे? हे कथित होते.दुबार पेरणीसाठी सासर्‍याला सूनबाईच्या गळ्यातले मनी मोडताना सास-याच्या जीवाची होणारी घालमेल दिसून येते. लहरी पावसाच्या भरोशावर शेती करणाऱ्या शेतकऱ्यांची कशी दैना होते ते शेतकऱ्यांची दैना या कथेतून दिसून येते.
          ग्रामीण भागातला आपलेपणा, माया, जिव्हाळा, आपुलकी, गोडी, एकमेकांना विचारपूस करणारी लोकं,  शहरात राहिली नाहीत असं गड्या आपला गाव बरा या कथेत लेखकाने विलासच्या रुपाने सांगण्याचा प्रयत्न केला आहे. हाच मुलाचा बाप या कथेतून राजकारणांचे डावपेच, राजकारण्यांची अनैतिकता, गाव गप्पातून ग्रामीण भागात कशी रंगते?  हे वाचण्यासारखे आहे. मोठ्या मार्मिक शब्दात संजय महल्ले यांनी ते मांडले आहे. कुत्र्याची समाधी या कथेत कुत्र्याची समाधी म्हणूनशिन्या अळ्ळावून राहिले. कुत्र्यावानी लोकं! त्या शिवाजीराजानं सोताच्या जीवाचं रान करूनशिन्या तुमा-आमची अब्रू वाचोली. सराज्य उभारलं ते नाही का आठोत कोनाले...अन त्या एका कुत्र्याचीच  पळली सा-याईले.वा रे वा जमाना आन,बेमान लोकं..." 'इमानदार वाघ्या' या कथेतून छत्रपती शिवाजी महाराजांनी जीवाचं रान करून सगळ्या लोकांची अब्रू वाचवली गनिमासोबत अख्खं आयुष्य लढाया करण्यात घालवलं. स्वतःसाठी न जगता रयतेसाठी जगणारे या जाणत्या राजाला आठवा. कशाला कुत्र्याच्या नादी लागून राहिले? असा खडा सवाल लेखक संजय महल्ले यांनी मोठ्या जाणीवपूर्वक खेदात्मकतेने केला आहे. महादेवाच्या नंदी या कथेत विठ्ठल बैलजोडी विकायला निघालेल्या पाहून त्यावर चिडणारा त्याचा म्हाताऱ्या बापाचा जीव गुंतलेला असतो. म्हातारा बैल जोडी विकायला विरोध करतो तेंव्हा विठ्ठल खूप संतापतो. मग म्हातारा आम्हांला पण विकून टाक. आम्ही आता म्हातारे झाले आहोत. असा मार्मिक सवाल केल्याने प्रत्येक वाचकांच्या डोळ्यात पाणी तरळल्याशिवाय राहणार नाही. नामशेष होत चाललेली बैलाची जोडी आता सर्वत्र ट्रॅक्टरने जागा घेतली आहे. पण ट्रॅक्टरला तेल घातल्याशिवाय ते चालत नाही पण मुक्या, इमानदार निष्पाप बैलांना सांभाळलं शेतकऱ्याचे जीवन धन्य झाल्याशिवाय राहणार नाही.असे दिसून येते.असं मुक्या प्राण्यांचं महत्त्व आणि गरज लक्षात येते.
         वाढत्या महागाईमुळे सर्वांचा जीव मेटाकुटीला आला आहे.महागाईमुळे भाव गगनाला भिडले आहेत. 'महागाईचा झटका' या कथेत म्हाताऱ्या बापाची तंबाखू आणायला पैसे शिल्लक न उरल्यामुळे मुलगा विठ्ठल बापाला तंबाखू आणू शकत नाही. वाढत्या महागाईचे चटके विठ्ठल व त्याच्या कुटुंबाला सहन करावे लागतात. जन्मदात्याला तंबाखू न दिल्याने वाढत्या महागाईमुळे न दिल्याचे दुःख लेखकाने अतिशय पारदर्शकपणे मांडले आहेत. 'शिक्षणाचा धंदा'  या कथेत लेखक संजय महल्ले यांनी वाढत्या शिक्षण संस्थांचे बाजारीकरण यावर प्रकाश टाकला आहे. शहरातल्या शाळा पैसे उकळण्याचे यंत्र कशा बनत चालल्या आहेत.त्याचबरोबर वाढत्या अपघाताने जाणारे निष्पाप जीवांचे बळी अतिशय संवेदनशीलपणे लेखकांनी या कथेत मांडले आहे.
       पाटी-लेखणी या कथेत आजच्या काळात दुरापास्त झालेले पाटी दाखवली आहे. पूर्वीच्या काळी पाटी लेखणी होती. त्यामुळे पूर्वीच्या लोकांची अक्षरे सुंदर मोत्यासारखी होती. पूर्वी पाठीवर काही पण लिहिता आणि पुसून टाकता येत होते. त्यामुळे त्यांना नानाविध नावे, चित्र काढण्याची मुभा असायची. आजच्या चाकोरीबद्ध शिक्षणाने पाठीची जागा वहीने घेतली. त्यात पुस्तकांच्या दप्तरांचे ओझे आणि पाठीवर वहीवर काही चित्र काढण्याची मुभा आज नाही. बंदिस्त झाल्या सारखं लहान मुलांचे जीवन झाल्याने मन्याच्या आजीचं पाटी लेखणीवर लिहित असलेली कल्पना करून स्वतःच्या प्रतिभेला वाव देण्यासाठी भिंतीवर मन्याने काढलेले चित्र पाहून आजींना केलेलं मन्याचं कौतुक. त्यात भिंती खराब केल्याची आजच्या काळातील आईची खंत लेखकाने मोठ्या शिताफीने व्यक्त केली आहे.
      अस्सल विनोदी कथाकार संजय महल्ले यांचा गावगप्पा हा ४२ कथांचा संग्रह आहे. प्रत्येक कथा वाचताना वाचकाला आपण स्वतः प्रत्यक्षदर्शी त्या कथेत असल्याचा अनुभव येतो. एवढी सहजता व सुंदरता या कथासंग्रहात ठासून ठासून भरली आहे. शहरी भागात राहणाऱ्या लेखकाचेही ग्रामीण मातीशी व इथल्या बोलीशी कशी नाळ जुळलेली आहे ? हे कथासंग्रह वाचताना लक्षात येते. मानवी जीवनाकडे बघण्याचा मिस्कीलपणा, मार्मिक शब्दकळा,शब्द सौंदर्याने नटलेली भाषाशैली आणि लेखकाची विनोदी वृत्ती लक्षात येते.
      समाजातलं भयान वास्तव, समाजातील मागासलेपण, सामान्य माणसाचं राजकारण, धर्मकारण, हेवेदावे, जगण्याची ओढाताण, पूर्वीचा काळ, त्यातील माणसाची माया,आपुलकी, जिव्हाळा, नात्यातील गुंता, जीवनात येणारे सुख दुःख, शिक्षणाचं भांडवल करून निघालेल्या शिक्षणाचे बाजारीकरण, खाजगीकरण, राजकारणातील भयान वास्तव,सोवळं या कथेतून अंधश्रद्धेवर केलेली टीका, असे अनेक ज्वलंत प्रश्न, जगण्यातील आव्हाने, जगण्याचे सूक्ष्म निरीक्षण लेखक संजय महल्ले यांनी गावगप्पाच्या माध्यमातून टिपले आहे.
      माणसाच्या दैनंदिन जगण्यातला विनोद, स्वभाव वैशिष्ट्ये टिपणे हे संजय महल्ले यांचे खास वैशिष्ट्य असून अस्सल वऱ्हाडी गावरान मेवा म्हणजे गावगप्पा कथासंग्रह आहे. प्रत्येकाने आवर्जून वाचावा असाच कथासंग्रह म्हणजे गावगप्पा...
           लेखक संजय महल्ले यांना पुढील वाटचालीसाठी खूप खूप शुभेच्छा व त्यांच्या हातून अनेकानेक साहित्य सेवा घडावी अशी ईश्वरचरणी प्रार्थना...!!

समीक्षिका/ लेखिका/ शिक्षिका/ कवयित्री 
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जि.परिषद प्राथमिक शाळा कोकलगाव 
ता.जि. वाशिम 
फोन ९७६७६६३२५७

Wednesday, 16 March 2022

त्याग,समर्पण,माणुसकी शिकवणारा काव्यसंग्रह म्हणजे पिंपळ व्हायचंय मला....!

*त्याग,समर्पण, माणुसकी शिकवणारा काव्यसंग्रह म्हणजे पिंपळ व्हायचंय मला*

       आज मानवी जीवन धावपळीचं बनत चालले आहे. माणसाला माणसाप्रमाणे माणूस जगू देत नाही.आज मानवाची मलिनता भयानक वाढत चालली आहे. माणसाचा स्वार्थ वाढला आहे. त्यामुळे ना नातीगोती दिसत आहेत, ना मानवता, ना कुणाचा त्याग, ना समर्पणाची भावना, ना संवेदनशीलता कुणांमध्ये दिसत आहे. दिसतो तो फक्त स्वार्थ, अहंभाव, आपल्याच विश्वात गुंग असणारी, मनानी खुजी असणारी माणसं. त्यात कितीही उच्च शिक्षित झाली असली तरी अंधश्रद्धेच्या आहारी जाणारी, बुवा, साधूंच्या हातून भविष्य पाहण्यात मग्न असणारी माणसं, जातीयवादी मानसिकता निर्माण करून निसर्गातील रंगांची वाटणी करून नानाविध धर्माचे झेंडे मिरवणारी विषमता आज  समाजात दिसून येते. त्यासाठी माणसाला त्याग, समर्पण, माणुसकी शिकवणारा काव्यसंग्रह म्हणजे पिंपळ व्हायचंय मला.
           वर्धा जिल्ह्यातील सुप्रसिद्ध कवी, लेखक, समीक्षक असणारे, बुद्धिप्रामाण्यवादी विचार जोपासणारे, आंबेडकरी विचारांची कवी अरुण विघ्ने सरांचा पाचवा काव्यसंग्रह पिंपळ व्हायचंय मला नुकताच वाचनात आला. या काव्यसंग्रहाचे प्रकाशन परीस पब्लिकेशन पुणे यांनी केले असून नावाला साजेसे दर्जेदार मुखपृष्ठ सुप्रसिद्ध चित्रकार अरविंद शेलार यांनी साकारले आहे. या काव्यसंग्रहाची प्रथमावृत्ती १४ ऑक्टोबर २०२१ रोजी प्रकाशित झाली असून याचे मूल्य केवळ १५० रुपये असून यातली प्रत्येक कविता माणसाला माणूसपण शिकवणारी आहे. या काव्यसंग्रहाला प्रस्तावना व पाठराखण डॉ. युवराज सोनटक्के यांची लाभली असून या काव्यसंग्रहात शोषित व उपेक्षित लोकजीवनाचे यथार्थ चित्रण दिसून येते.

          झाड व्हायचंय मला उजेडाचं
          येथील रगतपित्या व्यवस्थेच्या छाताडावर 
          स्वयंदीप होऊन वर्तमानात प्रकाशनासाठी 

           झाड व्हायचंय मला मानवतेचं 
           अमानुषतेच्या बुडखावर माणुसकीची
           पालवी जपत बंधुता, मैत्रीने डवरलेलं....!!

         झाड माणसांला सर्व काही देत असतो. पानं, फुलं, फळं, सावली, डिंक, औषधी, पक्षांना आधार, वेलींना आधार, आणि शेवटी लाकूड. झाडाला फक्त द्यायचंच माहिती असते. झाड सावली देताना विचार करीत नाही की तो कोणत्या जातीचा आहे? कोण आहे ? गरीब आहे की श्रीमंत ?  स्त्री आहे की पुरुष ? सर्वांना सारखेच देत राहतो. कवी अरुण विघ्ने सरांना उजेडाचे झाड व्हायचे  आहे. इथल्या रक्त पिणाऱ्या व्यवस्थेच्या छातीवर स्वयंदीप होऊन प्रकाशनासाठी. कवीला झाड व्हायचे मानवतेचं, माणुसकीचं. अमानुषतेच्या बुंध्यावर  माणुसकीची पालवी जपण्यासाठी. बंधुता, मैत्रीणं मोहरण्यासाठी. संवेदनशील मनाचे कवी अरुण विघ्ने यांना जातिभेद समूळ नष्ट करण्यासाठी एकात्मतेची गाणी गाण्यासाठी झाड व्हायचे आहे असे वरील ओळीतून दिसून येते.
  
        हे क्रांतीसूर्या!
        तू उगवला नसतास तर 
        हे उजेडाचे जग आम्हांस 
        कदापिही दिसले नसते 
        रातकिड्यांनीही आम्हांला 
        केंव्हाच बंदिस्त केले असते...

       बोधिसत्व परमपूज्य डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांना सुर्याची उपाधी देत तू उगवला नसतास तर आज हे उजेडाचे जग कधीच दिसले नसते. रात किड्यांनी केंव्हाच बंदिस्त केलं असतं. आज सगळ्यांना साक्षर होता आलं नसतं. तूच आमचा उद्धारक आहेस. तूच आमचा मुक्तिदाता आहेस. हे ज्ञानसूर्या तुझ्यामुळेच आमच्या जीवनाचं सोनं झालं असे वरील ओळीतून कवीला वाटते.
      आयुष्यावर बोलू काही ही कविता माणसाचे आयुष्यच बदलून टाकते. माणूस ज्या भाकरीसाठी आयुष्यभर मरमर करतो. वाकळी ऐवजी गादीवर झोपतो. माझा बंगला, माझी गाडी, माझं घर म्हणतो. माणूस अमाप दुःख आणि विरह सहन करतो. या साऱ्या गोष्टी आयुष्याने दिल्या. आप,तेज,  वायू,धरणी, आकाश सर्व दिलस ज्यात माणूस एक दिवस विलीन होणार आहे. माणसाला सरतेशेवटी काही सोबत नेता येणार नाही. फक्त माणसाच्या नावाबरोबरच त्याचं चांगलं सत्कार्यच मागे चिरंतर उरणार आहे. वास्तव माणसाला माणूसपण आणि शहाणपण शिकवणा-या कवी अरुण विघ्ने सरांच्या ओळी थेट काळजाला जाऊन भिडणा-या आहेत.
         कोविड 19 च्या काळात एका विषाणूने सर्वांना खूप काही शिकवलं. कवी अरुण विघ्ने सरांच्या यापासून आम्ही काय शिकलो?  ही कविता माणसाला विचार करायला लावणारी आहे. एका विषाणुने जवळपास दोन वर्ष साऱ्या जगावर थैमान घातलं होतं. सर्वजण घरात बंदिस्त झाले होते. स्मशानात प्रेत ठेवायला जागा नव्हती. ना कोणत्या प्रेताला अंघोळ नव्हती. कोणी कोणाच्या मातीला जायला तयार नव्हता. माणसाला माणसाचा जीवच  फक्त प्रिय होता. हे वास्तव कवीने आपल्या कवितेतून मांडले आहे.

           लढत लढत जगायचं 
           की जगत जगत लढायचं हे तुम्हीच ठरवा
           मन म्हणेल तसं जगायचं 
           जगताना काय शिकायचं हे तुम्हीच ठरवा...

         कवी अरुण विघ्ने सरांच्या वरील ओळी माणसाला जगायला शिकवणाऱ्या आहेत. जीवन जगताना प्रत्येकाला लढाई ही करावीच लागते. मग ते लढत लढत जगता आले पाहिजे. की जगत लढायचं हे ज्याने त्याने ठरवायचं असतं कवीला वाटते शेवटी कवी म्हणतो की मन मानेल तसं जगा आणि जगताना काय शिकायचं ? हे तुम्हीच ठरवा. संकट काळात कोण खरं कोण खोटं हे कसं ओळखायचं हे तुम्हीच ठरवा असे कवी म्हणतो.
        प्रज्ञा, शील, करुणा जपणारा संवेदनशील मनाचा कवी अरुण विघ्ने कधी मृदू शब्दातून बोलतो तर कधी व्यवस्थेच्या मुळाशी कठोर शब्दांनी प्रहार करतो. समाजातले भयाण वास्तव, लोकशाही, विषमतेची दरी, जगा आणि जगू द्या, जीवनाचे अंतिम सत्य,  माणसातलं माणूसपण, आपलेपण,  आंबेडकरी आशावाद, शिवरायांचे विचार आणि झाडासारखी परोपकारी भावना, विषाणूचा भयानक काळ, त्यातून मिळालेली शिकवण, संविधानाने दिलेले समान हक्क, अधिकार आणि कर्तव्य, माय ने खाल्लेल्या खस्ता, गरिबीची जाणीव, झाडाची समर्पणवृत्ती, मानवी मनाच्या ओलाव्यात असलेली सदभावना, समाजाच्या व्यथा, वेदना, प्रश्न, व्यवस्थेशी भांडून न्याय मागणारा कवी म्हणजे अरुण विघ्ने होय.

       राख झाली घराची, माणसाच्या नशा ने 
      थंड झालेल्या चुलीला, पेटवावे कशाने ?

      वरील गझलेतून कवी अरुण विघ्ने सरांनी माणूस नशेच्या आहारी गेल्यावर घरादाराची, संसाराची कशी राखरांगोळी होते, संसार कसा उद्ध्वस्त होतो? व्यसन किती भयानक असते? तसेच माणसाला चांगलं की वाईट याचं भान राहत नाही. नशेच्या आहारी गेलेला माणूस शेतीबाडी, घरदार सर्व विकायला सुरुवात करतो आणि वेगवेगळ्या आजाराने ग्रस्त होतो. नाहीतर मग आत्महत्या करून स्वतःचे जीवन संपवून टाकतो. मग मागच्यांनी कसं जगावं ? थंड झालेल्या चुलीला कशाने पेटवावं?  असा मार्मिक सवाल कवीने आपल्या शेरातून केला आहे.
         कवी अरुण विघ्ने सरांनी झाडासारखी उदात्त भावना जपायला सांगितली आहे. झाड कसं दान देतो?  तसं माणसाने सुद्धा आपल्या ऐपतीप्रमाणे दान करावं. असं कवीला वाटतं. कवीला कांही माणसांमध्ये झाडे दिसतात. भारतात जे संत होऊन गेले. महापुरुष होऊन गेले.त्यांच्या समाजकार्यात, आचारात, विचारात कवीला झाडाची प्रतिमा दिसते. अशा महान संतांच्या, त्यांच्या विचारांच्या, पावलावर पाऊल ठेवून नाही तर किमान त्यांच्या पावला मागे पाऊल टाकण्यासाठी कवीला परोपकारी पिंपळ व्हायचं आहे.
       कवी अरुण विघ्ने यांच्या पिंपळ व्हायचंय मला या काव्यसंग्रहात एकूण 83 कविता अत्यंत वाचनीय आहेत. मुक्तछंदातली कविता वेगळ्याच हातोटीने रचण्याची वेगळीच कला कवी अरुण विघ्ने सरांनी साधली आहे. प्रत्येकाने आवर्जून वाचावा असाच काव्यसंग्रह म्हणजे पिंपळ व्हायचंय मला. 
     कवी अरुण विघ्ने यांना पुढील वाटचालीसाठी खूप खूप शुभेच्छा.....!

समिक्षिका/लेखिका/ शिक्षिका/ कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे 
जि. प. प्राथमिक शाळा कोकलगाव 
ता. जि.वाशिम
मो.९७६७६६३२५७

Thursday, 3 March 2022

समाजातील भयाण वास्तव रेखाटणारा काव्यसंग्रह म्हणजे बा स्वातंत्र्या

 *समाजातील भयान वास्तव रेखाटणारा काव्यसंग्रह म्हणजे बा स्वातंत्र्या*

       कविता सहजच केली असं होत नाही किंवा कविता शिकवल्याही जात नाही. मुळात कवीच्या अंगी तसा गुण असावा लागतो. प्रतिभा असावी लागते. आपण समाजाचं काही देणं लागतो.या भावनेतून कविता जेव्हा निर्माण होते. तेंव्हा ती ही समाजाला जागृत करणारी ठरते. असेच समाजाचे वास्तव दर्शन घडवणारा, सडेतोडपणे, निर्भीडपणे आपले अनुभव लेखणीच्या माध्यमातून जनतेसमोर मांडणारा नागपूर जिल्ह्यातील कवी शंकर घोरसे यांचा बा स्वतंत्र्या हा काव्यसंग्रह नुकताच वाचनात आला.
       आज आपण पाहतो की अनेक लोक प्रेम कविता, काल्पनिक कविता, स्वप्नवेड्या कविता, पाऊस, फुलपाखरू, पशुपक्षी यांच्यावरच्या कविता करतात पण कवी शंकर घोरसे यांच्या कविता सामाजिक वास्तव, सामाजिक अधोगती, जगासमोर दाखवणा-या आहेत. खापरखेडा नागपूर या वीज केंद्रात औष्णिक विद्युत केंद्रात शंकर घोरसे तंत्रज्ञ असून विद्रोही कवी आहेत. अन्याय व अत्याचाराला वाचा फोडणारा, वास्तवतेचे दर्शन घडवणारा काव्यसंग्रह म्हणजे कवी शंकर घोरसे सरांचा बा स्वातंत्र्या.नागपूर जिल्ह्याचे कवी शंकर घोरसे यांचा 'बा स्वातंत्र्या' या काव्यसंग्रहची प्रथमावृत्ती १० मार्च २०१६ रोजी प्रकाशित झाली. प्रकाशक नाथे पब्लिकेशन लिमिटेड यांनी प्रकाशित केले आहे.तर प्रस्तावना राम भोंडे (शांन्तेय) यवतमाळ यांचे लाभली असून पाठराखण महाकवी सुधाकर गायधनी यांनी केली आहे. या काव्यसंग्रहात एकूण ५९ कविता विचार करायला लावणार्‍या आहेत. या काव्यसंग्रहाचे मूल्य केवळ एकशे पंचवीस रुपये असून सर्वच कविता वाचकांच्या मनाला थेट भिडणा-या आहेत.
     विकास आणि प्रगती या कवितेतून राजकारण्यांचा डाव खेळणारी माणसं आणि त्यांच्या योजना कागदोपत्री दाखवून जनसामान्यांच्या भावनांचा कसा फालुदा केला जातो. याचे भयानक चित्र खालील ओळी वाचून डोळ्यासमोर उभं राहतं.
        
       ‌गाव तसं दारूमुक्त गावात दारूचा थेंबही नाही
       गावाच्या वेशीवर मात्र
       गर्दी कमी होताना दिसत नाही 
       गावात शंभर टक्के दारूबंदी म्हणून
      आपण शपथेला जागून इथली माणसे
      गावात असताना दारूला शिवत नाही...

          गाव विकासाच्या गप्पा कशा कागदोपत्री थयाथया नाचतात हे विकास आणि प्रगती या कवितेतून स्पष्ट होते. गावाच्या सुरुवातीला हागंदरीमुक्त गाव दारूमुक्त गाव असा फलक दर्शनी भागात लावलेला असतो. आणि गावच्या वेशीवर मात्र गर्दी कमी होताना दिसत नाही. गावात शंभर टक्के दारूबंदी आहे. असं मोठ्या दिमाखात गाव सांगत असतं पण हीच लोक दारूबंदीसाठी घेतलेल्या शपथेला जागताना दिसत नाहीत.असे भयान वास्तव फक्त कागदोपत्री चालणाऱ्या योजनांचा खरपूस समाचार वरील कवितेतून कवी शंकर घोरसे यांनी घेतला आहे.

           हुंडा मागणाऱ्या वर पित्याचा
           देणाऱ्या वधूपित्यांचा 
           हुंड्यासाठी छळणार्‍या, अन जाळणाऱ्या
           सासू, सासरे, नणंद, दीरांचा 
          आणखीन एक सत्कार घ्यायचा आहे....

           समाजामध्ये वरवर चांगली दिसणारी पांढरपेशी माणसं यांचे दोन मुखवटे असतात. एक दाखवायचा अन एक लपवायचा. अशी भिन्न चेहेऱ्याची माणसं चारचौघांत गप्पा मारताना, भाषण करताना आम्ही हुंडा घेतला नाही. आणि घेणारही नाही असे मोठ्या दिमाखाने सांगतात आणि तेच लोक लपून-छपून हुंडा घेतात. अशा लोकांचा सत्कार घ्यायचा आहे. पुण्यासाठी चालणाऱ्या सासू-सासरा नंदन दीराचा हे आणखीन एक सत्कार घ्यायचा आहे.संवेदनशील पण विद्रोही मनाचा कवी शंकर घोरसे यांनी लेखणीला शस्त्र करून अन्यायाविरुद्ध, ढोंगीपणा, खोटी आश्वासने,व ढोंगी चेहरे अनेक गुन्हे करून मोकाट  फिरणाऱ्या सज्जन माणसाच्या विकृतीवर प्रहार करण्याचा प्रयत्न केला आहे.
      ३० जुलै १९९१ ची काळीकुट्ट रात्र, आक्रोश आणि किंकाळ्या कवीचं मन सुन्न करणारा तो वर्धा नदीचा महापूर. ही कविता वाचल्यावर वाचकाच्या डोळ्यांत पाणी आल्याशिवाय राहत नाही.

          गावाचं गावपण 
          आणि कित्येक संसार
          चाकासहित मोडले
         अगणित सारथी
         यमसदनी धाडले
         भगीरथाचे सामर्थ्य
         कुणातच नव्हतं म्हणून 
         मी हे सारं ऊघड्या
        डोळ्यानी बघत होतो साक्षीदार बनून...!!

       वरील ओळीतून महापुराचे भयान वास्तव आणि त्यांचे मोडून पडलेले संसार, यमसदनी गेलेले अनेक घरांची सारथी. हे सगळं थांबवण्याचा सामर्थ्य कोणातच नव्हतं. म्हणून कवी उघड्या डोळ्यांनी एक साक्षीदार बनून पाहत होतो अशी कविमनाची खंत साक्षीदार या कवितेतून दिसून येते. आर्थिक मंदी कुठे आहे? सध्या डोळ्यांना दिसत नाही आणि लाखो करोडो चे घोटाळे सरता सरत नाही.असं समाजातलं भयान वास्तव कवी शंकर घोरसे यांनी मंदी या कवितेतून जाब विचारला आहे. आज शिकली सवरलेली माणसं गर्भलिंग निदान करून मुलींना जन्मापूर्वीच मारत आहेत अशी खंत ज्योती सावित्री या कवितेतून दिसून येते. माणसाच्या गरजा निसर्गातील ऊर्जा भागवते. सर्वांनी ऊर्जा संवर्धनासाठी झटले पाहिजे.कोळसा,वायू, पेट्रोल, पाणी, जपले पाहिजे असा संदेश द्यायला कवी विसरत नाहीत. महात्मा ज्योतिबा फुले व क्रांतिज्योती सावित्रीआई फुले यांनी ज्या वाड्यात विद्यादानाचे पवित्र कार्य केले त्यावेळी वाड्याची आज झालेली दयनीय अवस्था कवीला अंधार या कवितेतून व्यक्त केली आहे. स्वातंत्र्य गुलाम झालं ही कविता अत्यंत वाचनीय व विचार करायला लावणारी आहे.
       दानाचे महत्त्व अगदी समर्पक ओळीतून प्रत्येक दान कस श्रेष्ठ असतो? ते कवी शंकर घोरसे यांनी स्वतःच्या दाना सह सर्वांनी नेत्रदान असो किंवा रक्तदान,अन्नदान, ज्ञानदान, श्रमदान, न्यायदान, देहदान इत्यादी दान करण्यासाठी समाजाला संदेश देण्याचा कवी प्रयत्न करतात. सरकारी कार्यालयातला संपत्तीच्या मोहापायी टेबलाखालून लाच मागणार्‍या अधिकाऱ्यांची तुलना कवी शंकर बोरसे यांनी बेधडक भीकार्‍याशी केली आहे.
       संस्कृती, मेकअप, निवडणूक,दंड,आत्मविश्वास, स्वातंत्र्य,स्त्री, लेखणीची किमया,संधीसाधू, गिधाडे साक्षर झाली,पुरस्कार,पुतळा,निर्भया, भविष्य, सत्कार, विकास आणि प्रगती,वास्तवाचा विस्तव या कविता अत्यंत वाचनीय व दर्जेदार आहेत. प्रत्येक कविता वाचताना डोक्यात मुंग्या आल्याशिवाय राहत नाहीत. सरळ साधी पण तिखट भाषा असल्याने कवी शंकर घोरसे यांचे शब्द हृदयाच्या पटलावर थेट जाऊन भिडतात. कवी शंकर घोरसे सरांच्या बहुतांशी कविता या मुक्तछंदातल्या असून काही अभंग काव्य प्रकारात मोडणा-या आहेत. मुक्तछंदातल्या कविता लाईटच्या प्रकाशासारखा थेट माणसाच्या डोक्यात प्रकाश टाकणा-या आहेत. 
          'बा स्वातंत्र्या'या कवितासंग्रहातील कविता सामाजिक जाणिवेला हात घालणाऱ्या, स्वातंत्र्य, हक्क, अधिकार सांगणार्‍या, नैतिक मूल्यांची पेरणी करणाऱ्या, मुर्दाड जमिनीवर माणुसकीचा पाऊस पाडणार्‍या, समाजातील स्वैराचार, सरकारी योजनांचा खोटा पाऊस, डुप्लिकेट माणसांची मुखवटे, हुंडाबंदी सारखी देशाला लागलेली कीड, निसर्ग चक्रातून मानवाला दाखवलेला सूकर मार्ग, निवडणूक असे समाजातील भयान वास्तव रेखाटणारा काव्यसंग्रह म्हणजे बा स्वातंत्र्या. नावातच सर्व काही सार्थ झालेलं. प्रत्येकाने आवर्जून वाचावा असाच काव्यसंग्रह म्हणजे 'बा स्वातंत्र्या'
           कवी शंकर घोरसे यांना पुढील वाटचालीसाठी खूप खूप शुभेच्छा...!!

समिक्षिका /लेखिका/ शिक्षिका /कवयित्री 
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे 
जि.परि. प्राथमिक शाळा कोकलगाव 
ता. जि.वाशिम
मो.९७६७६६३२५७