Sunday, 3 August 2025

सोडू नये निती (अभंग क्र.५६)

 *सोडू नये निती(अभंग क्र.५६)*

कधी माणसाने | सोडू नये निती |
लोकांस प्रचिती | असतेच || १||

वंशावळ खोटी| खोटेची करिती |
जगा दाखविती | मोठेपण || २ ||

जग हे शहाणे | ओळखती सारे |
हव्यासाचे वारे | सुटलेले || ३||

शहाण्याला असे | शब्दांचा मार |
मुर्खाचा बाजार | मांडलासी || ४ ||

काय तुझी निती | केलास कचरा |
माणूस ना बरा | दिसलासी || ५ ||

आपुल्या हाताने | दगड घातला |
मनात सलला | आंतरीक || ६ ||

खोटेपण दिसे | लोकं ही हुशार|
मानवा लाचार | का झालास || ७ ||

अतिहव्यासाचे | रे दुष्परिणाम |
करी घामाघाम | निर्लज्जास || ८ ||

सत्याचे हे सार | सत्य जिंकतसे
नाही लपतसे | खोटेपण || ९ ||

केवढी फजिती | गध्याची होतसे |
लालसा दिसते | गाढवाला || ९ ||

गाढवास काय | गुळाची ती चव |
नाही काय भेव | आंतरिचे || २० ||

तुझे मन ग्वाही | तूच आहे चोर |
परि शिरजोर | ठरलासी || ११ ||

एकदिन ऐसा | उगवेल खास|
सत्याचीच आस | दिसेलगा || १३||

नियतीचा खेळ | आज ना उद्याला |
साथ दे न्यायाला | राहशील || १४ ||

जैसी रे करणी | वैसी रे भरणी |
डोळा येई पाणी | कळेलच || १५ ||

शब्दांचा हा मार | मुर्खास कळेना |
वळता वळेना | बुध्दीलाही || १६ ||

मिनू म्हणे आता | हो बाई सावध |
सत्याचा गे वध | होत असे || १७||

कवयित्री
मिनाक्षी पांडुरंग नागराळे
जिल्हा परिषद प्राथमिक शाळा कोकलगाव
ता.जि.वाशिम...

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